राकेश कथूरिया, कैथल। मानसून का सीजन आते ही जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। कैथल में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए जिला उपायुक्त अपराजिता ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि तेज बारिश के दौरान लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में बनी रणनीति


हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों के साथ एक अहम बैठक की थी। इस बैठक में जिलावार मानसून की तैयारियों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जल निकासी की व्यवस्था को हर हाल में दुरुस्त रखा जाए। इसके अलावा बारिश के कारण फैलने वाली बीमारियों, जैसे मलेरिया को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं।

गुहला-चीका में बाढ़ नियंत्रण के विशेष प्रबंध


कैथल जिले का गुहला-चीका क्षेत्र बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। यहाँ सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग ने बड़े स्तर पर तैयारियां की हैं।

  • सरोला साइफन के 48 दर्रों की सफाई का काम पूरा कर लिया गया है।
  • नहरों और नालों से लगभग 16 फुट गाद निकालकर जल प्रवाह को सुगम बनाया गया है। घग्घर नदी के बांधों को विशेष रूप से मजबूत किया गया है।
  • आपातकालीन स्थिति के लिए 20,000 क्यूबिक मीटर मिट्टी का स्टॉक जमा किया गया है।

शहरी क्षेत्रों में जल निकासी पर जोर

केवल ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं, बल्कि शहरी इलाकों में भी जलभराव को रोकने के लिए प्रशासन ने नगर परिषद और नगर पालिकाओं को काम पर लगाया है। डीसी अपराजिता ने बताया कि जिले की सभी मुख्य ड्रेनों की दो बार सफाई करवाई जा चुकी है। इससे पानी निकासी की क्षमता बढ़ गई है। अधिकारियों की टीमें लगातार क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं। यदि कहीं भी कोई कमी मिलती है, तो उसे तुरंत ठीक करने का कार्य किया जा रहा है।

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