अनिल मालवीय, इछावर। मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था और पुलिस की संवेदनशीलता को कटघरे में खड़ा कर देने वाला एक मामला सामने आया है। एक तरफ जहां प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सीहोर में एक पीड़ित मां अपनी गोद में मासूम बच्चे को लेकर घंटों तक कड़कड़ाती धूप और फिर रात के अंधेरे में सड़क पर बैठने को मजबूर रही लेकिन पुलिस उसकी FIR दर्ज करने के बजाय उसे एक थाने से दूसरे थाने के चक्कर कटवाती रही।
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क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला संतोषी बाई की 18-19 साल की बेटी जंगल में बकरी चराने गई थी। इसी दौरान खेत में बकरी चले जाने की मामूली बात को लेकर एक दबंग व्यक्ति और उसके करीब 5 से 6 साथियों ने मिलकर युवती के साथ बेरहमी से मारपीट की। लाठियों और थप्पड़ों के इस हमले में युवती गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे इलाज और मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
घंटों बैठी रही मां, पुलिस खेलती रही टालमटोल का खेल
हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के बाद न्याय की आस में पीड़ित मां अपनी गोद में छोटे से बच्चे को लेकर शाम 4 बजे से ही थाने के बाहर सड़क पर बैठी रही। महिला का कहना है कि पुलिस उसकी शिकायत सुनने और मामला दर्ज करने को तैयार ही नहीं है।
पीड़िता ने रोते हुए सुनाई पूरी कहानी
पीड़िता ने कहा कि हमारी एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है। पुलिस वाले कुछ करने के बजाय मामले को टाल रहे हैं। कभी कहते हैं कि इधर जाओ, तो कभी मंडी थाना जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। हम लाचार लोग न्याय के लिए आखिर कहां जाएं?
सीहोर पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल
यह घटना सीहोर पुलिस की कार्यशैली और महिलाओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। जब मामला एक महिला और उससे गंभीर मारपीट से जुड़ा है, तो पुलिस तुरंत Zero FIR कर जांच शुरू करने के बजाय पीड़िता को क्षेत्राधिकार का बहाना बनाकर क्यों भटका रही है?
एक लाचार महिला छोटे बच्चे को लेकर रात के अंधेरे में थाने के सामने सड़क पर बैठी रही, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने उसकी सुध लेना उचित क्यों नहीं समझा? अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं कि वे एक अकेली युवती पर लाठियों से हमला कर देते हैं और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है?
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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, प्रशासन में हड़कंप
इस वाक्ये का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे पुलिस प्रशासन पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है। अब देखना यह होगा कि मामला तूल पकड़ने के बाद सीहोर पुलिस प्रशासन जागता है और दोषियों पर कार्रवाई करता है, या फिर इस गरीब और पीड़ित परिवार को न्याय के लिए ऐसे ही दर-दर भटकना पड़ेगा।

