सोहराब आलम/मोतिहारी। सुगौली थाना क्षेत्र के फुलवरिया गांव में वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने एक संयुक्त अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। अवैध रूप से संचालित धनधन प्लाईवुड एंटरप्राइजेज नामक आरा मिल पर की गई छापेमारी के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई लकड़ी के अवैध कारोबार और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ वन विभाग की सघन मुहिम का हिस्सा मानी जा रही है।
डीएसपी के नेतृत्व में हुई छापेमारी
वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि फुलवरिया स्थित उक्त आरा मिल में लकड़ी का अवैध भंडारण और व्यापार किया जा रहा है। सूचना मिलते ही सुगौली के डीएसपी ऋषभ कुमार के नेतृत्व में वन विभाग की एक विशेष टीम ने मौके पर धावा बोला। टीम के अचानक पहुंचने से मिल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया।
कागजात न मिलने पर मिल सील
छापेमारी के दौरान जब अधिकारियों ने मिल संचालक से लकड़ी की खरीद-बिक्री, परिवहन और मिल संचालन से संबंधित वैध लाइसेंस व कागजात मांगे, तो वे उन्हें पेश करने में पूरी तरह विफल रहे। संतोषजनक दस्तावेज न मिलने के बाद अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से आरा मिल को सील करने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने बताया कि बिना विधिवत कागजातों के आरा मिल का संचालन करना वन अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
वन विभाग के अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा है कि मिल संचालक को दस्तावेज जमा करने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी गई है। यदि निर्धारित समय के भीतर मिल मालिक कानूनी रूप से वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाते हैं, तो उनके खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और भविष्य में सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
इस छापेमारी के बाद पूरे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि जिले में बिना वैध लाइसेंस के कई छोटी-बड़ी आरा मिलें धड़ल्ले से चल रही हैं, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। प्रशासन की इस कार्रवाई से अवैध लकड़ी कारोबारियों में भय का माहौल है। वन विभाग की टीम फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मिल में काटी जा रही लकड़ी कहां से मंगाई जा रही थी और इसे कहां खपाया जा रहा था। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

