सोहराब आलम/मोतिहारी। नगर निगम इन दिनों डिज्नीलैंड मेले के टेंडर को लेकर उठे विवादों के भंवर में फंसा हुआ है। शहर के नगर भवन मैदान में लगने वाले मेले के टेंडर आवंटन में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूर्व पार्षद मणिभूषण श्रीवास्तव ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
राजस्व को करोड़ों का चूना लगाने का आरोप
पूर्व पार्षद मणिभूषण श्रीवास्तव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने साक्ष्यों के साथ दावा किया कि पिछले वर्ष जिस मेले का टेंडर 54 लाख रुपये में संपन्न हुआ था इस बार उसी मेले का टेंडर मात्र 14 लाख रुपये में कैसे आवंटित कर दिया गया? उन्होंने इसे नगर निगम के राजस्व को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाने वाला एक सुनियोजित फैसला करार दिया। श्रीवास्तव का कहना है कि इतने कम मूल्य पर टेंडर देने के पीछे बड़ी गड़बड़ी की आशंका है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
एसडीएम के आदेश के बावजूद कब्जा क्यों?
इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि सदर एसडीएम ने इस टेंडर प्रक्रिया को संदिग्ध मानते हुए इसे निरस्त कर दिया था। बावजूद इसके, मेला स्थल को अब तक खाली नहीं कराया गया है। पूर्व पार्षद ने नगर निगम की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि प्रशासनिक आदेश के उल्लंघन के बाद भी निगम प्रशासन मौन क्यों है? उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के अधिकारी जवाबदेही से बच रहे हैं और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
शासन तक पहुंची शिकायत
मणिभूषण श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि जब वे इस मामले में सवाल उठा रहे हैं तो कुछ लोग सोशल मीडिया का सहारा लेकर भ्रामक जानकारियां फैला रहे हैं ताकि ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत नगर विकास एवं आवास विभाग के साथ-साथ मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेजी गई है। उल्लेखनीय है कि टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभागियों की कम संख्या और फिर इतनी कम राशि पर आवंटन होना पहले दिन से ही संदेह के घेरे में था। अब देखना यह है कि क्या शासन स्तर से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला केवल फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

