सोहराब आलम/मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले के पिपरा कोठी थाना क्षेत्र में प्रस्तावित वाटर पार्क के निर्माण के लिए प्रशासन द्वारा जमीन की नापी कराने पहुंची टीम को रविवार को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थानीय किसानों और प्रशासन के बीच हुई तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की से क्षेत्र का माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण रहा। आक्रोशित किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी सूरत में प्रशासन को नहीं सौंपेंगे।

​क्या है पूरा मामला?

​विवादित जमीन को लेकर किसानों का दावा है कि वे वर्षों से इस भूमि पर खेती करते आ रहे हैं और उनके पास मालिकाना हक के वैध दस्तावेज मौजूद हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना उचित प्रक्रिया अपनाए अचानक उनकी जमाबंदी रद्द कर दी है और अब जबरन जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई कर रहा है। वाटर पार्क के नाम पर अपनी उपजाऊ जमीन छिनते देख किसानों का सब्र टूट गया और वे बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग नापी स्थल पर जुट गए।

​पुलिस और ग्रामीणों में हुई झड़प

​जब प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस ने नापी शुरू करने का प्रयास किया तो किसानों ने उसे रोकने की कोशिश की। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई और पुलिस व ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की व झड़प शुरू हो गई। ग्रामीणों ने पुलिस पर बल प्रयोग करने और महिलाओं के साथ अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगाया है। किसानों का कहना है यह जमीन हमारी आजीविका का एकमात्र साधन है। हम जान दे देंगे लेकिन अपनी जमीन से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।

​प्रशासनिक सख्ती के बीच नापी शुरू

​तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए मौके पर सदर एसडीओ निशांत सिहारा और डीएसपी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। घंटों की खींचतान और हंगामे के बाद, प्रशासन ने कड़े सुरक्षा घेरे में जमीन की नापी का काम शुरू कराया। हालांकि, इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
​वर्तमान में इलाके में स्थिति नियंत्रण में है लेकिन किसानों के रुख को देखते हुए तनाव बरकरार है। आसपास के गांवों में भारी संख्या में पुलिस बल की गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। फिलहाल प्रभावित किसान कानूनी लड़ाई और आंदोलन तेज करने की रणनीति बना रहे हैं।