सोहराब आलम/ मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ पुलिस कप्तान स्वर्ण प्रभात ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। एसपी ने कोर्ट परिसर में तैनात 10 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि वे कोर्ट में पेशी के लिए लाए गए कैदियों से रिश्वत लेकर उनकी मुलाकात बाहरी लोगों से कराते थे।

​’सेटिंग गेम’ का हुआ भंडाफोड़

​पिछले कुछ समय से एसपी स्वर्ण प्रभात को लगातार यह गोपनीय सूचना मिल रही थी कि उपकारा और मंडल कारा से कोर्ट परिसर में लाए जाने वाले कैदियों को सुरक्षा के नाम पर तैनात जवान ही नियमों के विरुद्ध विशेष लाभ पहुंचा रहे हैं। जांच में यह बात सामने आई कि कुछ पुलिसकर्मी पैसे के लालच में गंभीर अपराधियों और कैदियों को उनके परिजनों, खास लोगों और यहां तक कि अज्ञात महिलाओं से एकांत में मुलाकात करवाते थे। यह न केवल जेल मैनुअल का उल्लंघन था, बल्कि एक बड़ी सुरक्षा चूक भी थी।

​डीएसपी स्तर से कराई गई गुप्त जांच

​मामले की गंभीरता को भांपते हुए एसपी ने डीएसपी (रिजर्व) को पूरे प्रकरण की गुप्त जांच सौंप दी। जांच के दौरान जब औचक निरीक्षण किया गया, तो पुलिसकर्मियों और कैदियों के बीच चल रहे इस पूरे “सेटिंग गेम” का खुलासा हो गया। जांच रिपोर्ट में सभी आरोप सही पाए गए, जिसके बाद एसपी ने बिना किसी देरी के बड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया।

​एसपी की दो टूक: भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं

​शुक्रवार को एसपी स्वर्ण प्रभात ने ड्यूटी पर तैनात उन 10 पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया, जो इस अनैतिक कार्य में संलिप्त पाए गए थे। साथ ही, इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। एसपी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार, मनमानी और संदिग्ध आचरण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खाकी की गरिमा को धूमिल करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस कार्रवाई से मोतिहारी पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

एसपी की इस त्वरित और कड़े रुख की चर्चा पूरे जिले में हो रही है, जिससे यह संदेश गया है कि यदि पुलिसकर्मी ही अपराधी के मददगार बनेंगे, तो उनके खिलाफ कानून का डंडा सबसे पहले चलेगा।