सोहराब आलम/ मोतिहारी। पूर्वी चंपारण से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल शिक्षा के मंदिर को कलंकित किया है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के पचपकड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत भंडार स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय बसहिया में एक युवक को ‘तालिबानी सजा’ देने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है।

​चापाकल बना प्रताड़ना का खंभा

​सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा जा रहा है कि एक युवक को स्कूल परिसर के भीतर ही चापाकल से रस्सियों के सहारे बांधा गया है। आरोपी, जो कथित तौर पर उसी स्कूल का एक शिक्षक बताया जा रहा है, कानून को अपने हाथ में लेकर युवक पर लाठी-डंडों से बेरहमी से प्रहार कर रहा है। पीड़ित युवक खुद को बचाने की गुहार लगाता रहा, लेकिन हमलावर का दिल नहीं पसीजा।

​चोरी का मामूली आरोप और कानून का उल्लंघन

​प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पीड़ित युवक ढाका थाना क्षेत्र का निवासी है। उस पर स्कूल में चोरी करने का संदेह था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस को सूचना देने या कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय, शिक्षक ने खुद ही ‘न्यायाधीश’ बनने का फैसला किया। वायरल वीडियो में शिक्षक की बर्बरता साफ झलक रही है, जबकि आसपास खड़े लोग तमाशबीन बनकर इस कृत्य को देखते रहे। किसी ने भी युवक को बचाने या शिक्षक को रोकने का साहस नहीं दिखाया।

​आक्रोश और पुलिसिया कार्रवाई

​इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। शिक्षा के मंदिर में हुई इस हिंसा ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पचपकड़ी थाना पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है और उसमें दिख रहे चेहरों की पहचान की जा रही है ताकि दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।

​व्यवस्था पर सवाल

​यह घटना बताती है कि आज भी समाज के कुछ हिस्सों में कानून का भय समाप्त हो चुका है। एक शिक्षक, जिसकी जिम्मेदारी बच्चों को नैतिकता और अनुशासन सिखाना है, उसका यह हिंसक रूप समाज के लिए खतरनाक संकेत है। फिलहाल, स्कूल प्रशासन या आरोपी शिक्षक की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।