अजय सैनी, भिवानी. सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से प्रदेश के शिक्षित युवाओं और कच्चे कर्मचारियों के भविष्य के साथ क्रूर मजाक किया जा रहा है। सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव धर्मबीर सिंह भाटी और भिवानी ब्लॉक प्रधान अशोक कुमार गोयत ने सरकार पर अदालती आदेशों की अवहेलना करने, युवाओं को बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलने और बिजली कर्मचारियों को मौत के कुएं में बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

संघ ने ऐलान किया है कि इस नाइंसाफी के खिलाफ अब हर शहर में नुक्कड़ सभाएं, गांवों में पंचायतें और विभागों के द्वारों पर गेट मीटिंग कर सरकार को बेनकाब किया जाएगा। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला सचिव धर्मबीर सिंह भाटी ने सरकार, उच्च अधिकारियों और एक तथाकथित साठगांठ वाली यूनियन पर सीधे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश के लाखों कच्चे कर्मचारियों को जानबूझकर हरियाणा कौशल रोजगार निगम के दलदल में धकेला है।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को कर्मचारियों को पक्का करने के संबंध में एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया था, लेकिन सरकार ने कोर्ट के आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। उलटा कर्मचारियों पर मानसिक व प्रशासनिक दबाव बनाकर उनसे 58 साल की जॉब गारंटी के हलफनामे जबरन लिखवाए गए। जिन्होंने स्वाभिमान के साथ समझौता नहीं किया और हलफनामे नहीं दिए, उन्हें विभाग द्वारा पत्र जारी कर प्रताडि़त किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी विभागों को निजी हाथों में बेच रही है, जिससे राज्य में बेरोजगारी की दर 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। पढ़े-लिखे युवा दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं और भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने के कारण हताश होकर आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हैं। साथ ही उन्होंने नागरिक अस्पताल में लगे कच्चे कर्मचारियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हे पिछले 4 माह से वेतन नहीं मिला है, जिसके चलते उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।


सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के भिवानी ब्लॉक के प्रधान अशोक कुमार गोयत ने बिजली विभाग के फील्ड कर्मचारियों की जानलेवा और दयनीय कार्यस्थितियों का कच्चा चि_ा खोला। गोयत ने कहा कि बिजली जैसे अत्यंत संवेदनशील और जोखिम भरे विभाग में सुविधाओं और संसाधनों की भारी कमी के कारण आए दिन कर्मचारी हादसों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पारा 49 डिग्री सेल्सियस को पार कर रहा है, उस चिलचिलाती धूप और दोपहर में हमारे कर्मचारी 11 मीटर ऊंचे लोहे के पोल पर चढक़र बिजली सुचारू रखने के लिए काम करते हैं। गांवों के कंप्लेंट सेंटरों पर तैनात इन कर्मचारियों की ड्यूटी बिना किसी आराम के 24-24 घंटे लगाई जा रही है, जबकि उनके अधीन आने वाले फीडर कई किलोमीटर लंबे हैं। यही नहीं यदि गांव से 2 या 5 किलोमीटर दूर कोई फॉल्ट ठीक करने जाना पड़े, तो विभाग कर्मचारियों को कोई वाहन (गाड़ी) तक उपलब्ध नहीं कराता। यदि गांव से बाहर ऊंचाई पर तार टूट जाए, तो सीढ़ी तक का प्रबंध नहीं होता। हमारी मांग है कि कर्मचारियों के लिए तुरंत सरकारी वाहन और हाइड्रा/लिफ्ट का विशेष प्रबंध किया जाए।


कर्मचारी नेताओं ने बताया कि पिछले दिनों 26 मई को माननीय बिजली मंत्री अनिल विज के साथ सर्व कर्मचारी संघ की एक उच्च स्तरीय वार्ता हुई थी। वार्ता में बिजली मंत्री ने आश्वासन दिया था कि वे नगरपालिका में दिए जा रहे जोखिम भत्ते की फाइल को देखकर बिजली कर्मचारियों को भी जोखिम भत्ता देने का प्रयास करेंगे। लेकिन वो आश्वासन आज तक पूरा नहीं हुआ। सरकार के इस अडिय़ल और दमनकारी रवैये से नाराज होकर सर्व कर्मचारी संघ ने अब आर-पार के आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संघ ने घोषणा की कि वे गांव-गांव पंचायत और नुक्कड़ सभाएं: संघ अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा।

हरियाणा के हर शहर में नुक्कड़ सभाएं की जाएंगी और गांवों में पंचायतें करके आम जनता को बताया जाएगा कि सरकार उनके बच्चों का भविष्य किस तरह अंधकार में धकेल रही है। सभी सरकारी कार्यालयों और बिजली सब-स्टेशनों के गेट पर हर रोज़ प्रदर्शन और गेट मीटिंग्स की जाएंगी।


उन्होंने कहा कि संघ की मुख्य मांग है कि बढ़ती जनसंख्या और बढ़े हुए वर्कलोड के अनुसार नए स्थाई पदों का सृजन किया जाए और युवाओं को योग्यता के आधार पर पक्की सरकारी नौकरियां दी जाएं। नेताओं का दावा है कि इससे बेरोजगारी, विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और बढ़ते अपराधों पर भी लगाम लगेगी।