समीर शेख, बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के केला उत्पादक किसान ईरान-इजरायल युद्ध के कारण संकट में हैं। खाड़ी देशों में जारी तनाव से केले का निर्यात रुक गया है, जिससे किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। बड़वानी का केला अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां से हर साल बड़ी मात्रा में केला ईरान, इराक, इजरायल, बहरीन, तुर्की और दुबई समेत अन्य मध्य-पूर्वी देशों को निर्यात किया जाता है।
नर्मदा किनारे की उपजाऊ भूमि और नदी के पानी से होने वाली खेती के कारण बड़वानी के केले का स्वाद और आकार विशेष होता है। खाड़ी देशों में जारी युद्ध और तनाव के कारण केले का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। रमजान के महीने में आमतौर पर केले की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इस बार बाजार में सन्नाटा पसरा है।
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फसल तैयार लेकिन नहीं मिल रहे खरीदार
किसान महेश राठौड़ ने बताया कि उन्होंने 6 एकड़ खेत में केले की फसल लगाई थी, जिस पर प्रति एकड़ 85 से 90 हजार रुपये का खर्च आया था। कुल लागत पांच लाख रुपये से अधिक थी। कुछ दिन पहले तक केले का भाव 22 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहा था, जो अब घटकर 8 से 9 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। राठौड़ के अनुसार, फसल पूरी तरह तैयार है, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं। कई किसान अपनी उपज लागत से भी कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो केला उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।
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व्यापारी ने भी लेने के लिए तैयार नहीं
किसान बलराम यादव का कहना है कि केले की फसल तैयार है लेकिन भाव नहीं मिल रहा। पहले 25 रुपये तक मिल रहा था, अब 8-9 रुपये में बेचना पड़ रहा है। लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है किसानों का कहना है कि जिले में हजारों एकड़ में लगा केला अब कम कीमत के चलते अपनी मिठास खो सकता है। बड़वानी का केला विदेशों में जाता था। मगर निर्यात नहीं होने के कारण यही खेरची में बिक रहा है और भाव नहीं मिल रहे हैं। कोई व्यापारी खरीदने को तैयार नहीं है।

