साबरमती नदी के किनारे खुले खेतों के बीच जब गुजरात की नई राजधानी की पहली ईंट रखी गई थी, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह स्थान एक दिन राज्य की सियासत और अर्थव्यवस्था का मुख्य केंद्र बनेगा। देश के सबसे आधुनिक, हरित और सुनियोजित शहरों में शुमार गांधीनगर आज गुजरात का स्वाभिमान बन चुका है। वक्त के साथ इसे ‘गांधियन सिटी’, ‘अनपॉल्यूटेड सिटी’ और ‘ग्रीन सिटी’ जैसी पहचान मिली।

भाषा आंदोलन से हुआ जन्म

1 मई 1960 को जब गुजरात अलग राज्य बना, तब सबसे बड़ा प्रश्न राजधानी के चयन का था। अहमदाबाद सबसे विकसित शहर था, लेकिन दूरदर्शी नेतृत्व ने किसी बने-बनाए शहर को चुनने के बजाय भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बिल्कुल नई राजधानी बसाने का ऐतिहासिक फैसला किया। 2 अगस्त 1965 को इस शहर की नींव रखी गई।

विदेशी सोच नहीं, भारतीय हाथों से मिला आकार

शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के लिए अमेरिकी आर्किटेक्ट लुई कान को जोड़ने का विचार था, लेकिन सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट था कि नई राजधानी का खाका भारतीय हाथों से ही तैयार होगा। यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी एच. के. (हरगोविंद कालिदास) मेवाड़ा और प्रकाश एम. आप्टे को सौंपी गई, जिन्होंने चंडीगढ़ प्रोजेक्ट में ले कॉर्बुजिए के साथ काम किया था। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से शिक्षित मेवाड़ा ने पश्चिमी सोच को किनारे रखकर महात्मा गांधी के विचारों और भारतीय नगर नियोजन को नक्शे के केंद्र में रखा।

नियोजन में झलकते हैं बापू के विचार

साबरमती के तट पर गांधी आश्रम की तर्ज पर प्लान किए गए इस शहर के शुरुआती मास्टर प्लान में बापू के स्मारक का विशेष स्थान था, जो बाद में ‘महात्मा मंदिर’ के रूप में साकार हुआ। गांधीनगर का नियोजन अपने समय से कई दशक आगे था:

  • ग्रिड और सेक्टर सिस्टम: पहले चरण में 30 सेक्टर विकसित किए गए। शहर को 1 किलोमीटर के ग्रिड सिस्टम, गोलचक्करों, तथा नंबरों और गुजराती वर्णमाला (क, ख, ग…) के नाम पर बनी सड़कों से सजाया गया।
  • भविष्य की क्षमता: शुरुआत में डेढ़ लाख की आबादी के लिए बना यह शहर FSR बढ़ाकर 3 लाख और फिर उत्तर-पश्चिम में 30 अन्य सेक्टरों के खाके के साथ साढ़े सात लाख लोगों को समाहित करने की क्षमता के साथ तैयार किया गया।
  • अनोखी वास्तुकला: गुजरात विधानसभा का आंतरिक स्थापत्य ‘कमल’ के फूल से प्रेरित है, जिसका पूरा भार बीच में स्थित एक विशाल खंभे पर टिका है।

वैश्विक पटल पर गांधीनगर

धूल भरे शहर से ‘ग्लोबल सिटी’ बनने का गांधीनगर का सफर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से तेज हुआ। आज का GIFT सिटी, विश्वस्तरीय डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, महात्मा मंदिर और मेट्रो कनेक्टिविटी उसी सोच का परिणाम हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गांधीनगर हरित और आधुनिक विकास की नई मिसाल पेश कर रहा है।

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