संजय पाटीदार, भोपाल। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आगामी चुनावों और सांगठनिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। संगठन ने अब निगम और मंडलों में नियुक्त होने वाले पदाधिकारियों के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है। इस नए कदम का उद्देश्य जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करना और आंतरिक गुटबाजी पर पूरी तरह से लगाम लगाना है।
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मंत्री का दर्जा और प्रोटोकॉल नहीं मिलेगा
इसी कड़ी में फिलहाल मंत्री का दर्जा और प्रोटोकॉल नहीं मिलेगा। निगम-मंडलों के पदाधिकारियों को मिलने वाले पारंपरिक मंत्री पद के दर्जे और वीआईपी प्रोटोकॉल पर फिलहाल रोक रहेगी। अब जोर केवल काम और जिम्मेदारी पर होगा। पार्टी संगठन इन सभी पदाधिकारियों को उन विधानसभा क्षेत्रों में भेजेगा जहां बीजेपी पिछले चुनावों में हार गई थी या जहां संगठन बेहद कमजोर स्थिति में है।
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गृह जिले और विधानसभा में नहीं मिलेगी जिम्मेदारी
लागू होगा ‘नो होम टर्फ’ (No Home Turf) फॉर्मूला: नेताओं को उनके गृह जिले या गृह विधानसभा क्षेत्र में कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी। उन्हें पूरी तरह से नए और अलग क्षेत्रों में जाकर काम करना होगा। अक्सर देखा जाता है कि गृह क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई और गुटबाजी शुरू हो जाती है। ‘नो होम टर्फ’ फॉर्मूले से इस आंतरिक कलह को रोकने में मदद मिलेगी।
संगठन ने दिया बड़ा संदेश
बीजेपी ने आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए समय से पहले ही जिम्मेदारियां तय करने का फैसला किया है, ताकि कमजोर सीटों पर समय रहते मजबूत पकड़ बनाई जा सके। संगठन ने साफ कर दिया है कि पद अब केवल प्रतिष्ठा या आराम के लिए नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर पार्टी के लिए पसीना बहाने और परिणाम देने के लिए दिए जाएंगे।


