राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज से पांच दिवसीय मध्य प्रदेश के दौरे पर रहेंगी। वे इंदौर, बैतूल, ओंकारेश्वर मंदिर (खंडवा), जबलपुर, ग्वालियर और श्योपुर कूनो नेशनल पार्क में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। प्रेसिंडेट के एमपी आगमन पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उन्हें एक पत्र लिखा हैं। जिसमें आदिवासी समाज के कई मुद्दे उठाए और आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष शिक्षा-स्वास्थ्य आपात योजना समेत कई मांगें की है।
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति के नाम एक पत्र लिखा हैं। जिसमें उन्होंने कहा कि ‘मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा आदिवासी आबादी वाला राज्य है। राज्य में अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग 1.53 करोड़ है, जो प्रदेश की कुल आबादी का लगभग 21 प्रतिशत है। देश की कुल आदिवासी आबादी का भी एक बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश में निवास करता है। संविधान निर्माताओं ने आदिवासी समाज को विशेष संरक्षण देने की परिकल्पना की थी, लेकिन आज भी मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचलों झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, मंडला, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी और शिवपुरी में विकास की तस्वीर बेहद चिंताजनक है।’
शिक्षा का संकट
उन्होंने आगे लिखा कि’आदिवासी समाज की उन्नति का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि आदिवासी समुदाय की साक्षरता दर राज्य की औसत साक्षरता दर से काफी कम है। जहां मध्य प्रदेश की कुल साक्षरता दर लगभग 70 प्रतिशत से अधिक है, वहीं अनुसूचित जनजातियों में यह लगभग 50 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई है। विशेष रूप से आदिवासी बेटियों की शिक्षा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। सैकड़ों विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं। दूरस्थ वन क्षेत्रों में छात्रावासों की स्थिति खराब है। उच्च शिक्षा तक पहुंच सीमित है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में आदिवासी युवा शिक्षा से वंचित होकर असंगठित श्रम बाजार की ओर धकेले जा रहे हैं।’
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली-बेरोजगारी और पलायन
जीतू पटवारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, बेरोजगारी और पलायन को लेकर भी बात कही। उन्होंने लिखा कि ‘आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट से गुजर रही हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, कुपोषण, एनीमिया और संक्रामक रोगों का बोझ आज भी अत्यधिक है। विशेष रूप से सहरिया जैसी अत्यंत कमजोर जनजातीय समूहों में टीबी और कुपोषण की समस्या राष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है। ‘प्रदेश के आदिवासी युवा रोजगार के अवसरों के अभाव में पलायन को विवश हैं। वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए परंपरागत आजीविका के साधन लगातार कमजोर हुए हैं। लघु वनोपज के उचित मूल्य, प्रसंस्करण और विपणन की समुचित व्यवस्था नहीं है। परिणामस्वरूप आदिवासी परिवार गरीबी और कर्ज के दुष्चक्र में फंसते जा रहे हैं।’
गरीबी/महंगाई का दोहरा प्रहार
पीसीसी चीफ ने आगे लिखा कि ‘विभिन्न अध्ययनों में अनुसूचित जनजाति समुदाय को देश के सबसे अधिक वंचित सामाजिक समूहों में पाया गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के अधिकांश मानकों पर आदिवासी समुदाय सबसे अधिक अभावग्रस्त है। आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं के विरुद्ध अपराध, मानव तस्करी, भूमि विवाद, वनाधिकार से जुड़े संघर्ष, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही है। अनेक मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय पाने के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।’ उन्होंने जल जंगल और जमीन का भी प्रश्न उठाया।
जीतू पटवारी ने की ये प्रमुख मांगें
- आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष शिक्षा एवं स्वास्थ्य आपात योजना लागू की जाए।
- रिक्त शिक्षक, डॉक्टर और पैरामेडिकल पदों की समयबद्ध भर्ती हो।
- वनाधिकार कानून का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए।
- आदिवासी युवाओं के लिए विशेष रोजगार एवं कौशल विकास मिशन संचालित किया जाए।
- कुपोषण, टीबी और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष अभियान चलाया जाए।
- आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तिकरण हेतु अलग कार्ययोजना बने।
- अनुसूचित जनजाति उपयोजना (TSP) के धन का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
- आदिवासी अंचलों में सड़क, पेयजल, इंटरनेट और उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार किया जाए।
- पेसा कानून और ग्राम सभाओं के अधिकारों का वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।
- आदिवासी समाज की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा आयोग गठित किया जाए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 5 दिवसीय मप्र दौरा
आपको बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इंदौर, बैतूल, ओंकारेश्वर, जबलपुर, ग्वालियर और श्योपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी
18 जून को इंदौर से बैतूल
बैतूल में ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से आयोजित “एम्पावरमेंट ऑफ ट्रायबल सोसायटी बाय स्पिरिचुअल अवेकनिंग” कार्यक्रम में शामिल होंगी। साथ ही ओंकारेश्वर पहुंचकर मंदिर में दर्शन एवं आरती में सम्मिलित होंगी।
19 जून
अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर ओंकारेश्वर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी।
20 जून को जबलपुर में
राष्ट्रपति 20 जून को जबलपुर पहुंचेंगी। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगी। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर के 36वें दीक्षांत समारोह कार्यक्रम में सहभागिता करेंगी।
22 जून
राष्ट्रपति मुर्मू कूनो नेशनल पार्क का भ्रमण करेंगी। इसके बाद वे ग्वालियर पहुंचकर नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।

