सतीश दुबे, डबरा। ग्वालियर जिले के डबरा में APJ स्कूल के एक वाहन का अगला पहिया चलते-चलते निकल गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त वाहन की रफ्तार काफी धीमी थी, जिसके चलते एक बहुत बड़ी अनहोनी होने से टल गई और गाड़ी पलटने से बच गई। इस घटना ने एक बार फिर स्कूली वाहनों की फिटनेस और मासूमों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिये हैं।

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पहिया टूटने के बाद भी अंदर बैठे रहे मासूम, चालक की घोर लापरवाही!

प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आई तस्वीरों के मुताबिक यह हादसा पूरी तरह से स्कूल प्रबंधन और वाहन चालक की घोर लापरवाही का नतीजा है। बताया जा रहा है कि APJ स्कूल का यह वाहन बच्चों को लेकर रोजाना की तरह स्कूल की तरफ जा रहा था तभी अचानक झटके के साथ गाड़ी के आगे का पहिया टूट गया।

पहिया टूटने के बाद गाड़ी अनियंत्रित होने लगी लेकिन रफ्तार कम होने की वजह से चालक ने जैसे-तैसे गाड़ी को रोक लिया, जिससे मासूम बच्चे चोटिल होने से बच गए। संवेदनहीनता की हद तो तब हो गई जब पहिया पूरी तरह से अलग होने के बावजूद बच्चे काफी देर तक उसी जर्जर वाहन के अंदर ही सवार दिखे। डरे-सहमे बच्चों को तत्काल सुरक्षित बाहर निकालने की जहमत तक नहीं उठाई गई।

डबरा में दौड़ रहे ‘यमराज’ के वाहन, पुलिस और RTO ने साधी चुप्पी

इस घटना ने डबरा के भीतर चल रहे स्कूली वाहनों के काले कारोबार की पोल खोलकर रख दी है। आपको बता दें कि डबरा क्षेत्र में कई नामी और निजी स्कूलों के ऐसे दर्जनों कंडम और जर्जर वाहन धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिनकी न तो कोई फिटनेस है और ना ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। ये गाड़ियां बच्चों के लिए किसी ‘सड़क पर दौड़ते यमराज’ से कम नहीं हैं।

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सबसे बड़ा सवाल स्थानीय पुलिस और आरटीओ (RTO) विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। आए दिन होने वाले इन हादसों और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इन कंडम वाहनों पर जिम्मेदार विभाग कोई सख्त कार्रवाई नहीं करता। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

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