अनिल मालवीय, सीहोर। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार एक तरफ स्कूल चलें हम और मुफ्त पाठ्य पुस्तक वितरण जैसी कई योजनाओं पर करोड़ो रुपये लगाकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। तो दूसरी तरफ भ्रष्ट अफसरों ने नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ करने की ठान रखी है। मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ करती एक तस्वीर सीहोर से सामने आई है, जहां बच्चों को बांटी जाने वाली लाखों रुपये की कीमती पाठ्य पुस्तकें खुले आसमान के नीचे कबाड़ और कूड़े के ढेर की तरह फेंक दी गई है, जो बारिश और धूप से सड़ रही है।
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तारामंडल परिसर बना ‘किताबों का कब्रिस्तान’, कचरे की तरह बिखरा ज्ञान
यह पूरा मामला सीहोर के आवासीय खेलकूद संस्थान के तारामंडल परिसर का है, जहां विभाग की संवेदनहीनता उजागर हुई है। तारामंडल के बाहर पाठ्य पुस्तकों का ढेर लगा हुआ है। ये किताबें किसी कबाड़खाने की तरह खुले में लावारिस छोड़ दी गई हैं।
आलम यह है कि कई किताबें फट चुकी है और बारिश में भिगकर गल रही है। जिससे इस बात का अंदाजा लगाना गलत नहीं होगा कि ये किताबें दो-चार दिन में नहीं बल्कि महीनों पहले यहां सड़ने के लिए रखी गईं है।
रद्दी में बेचने की थी तैयारी? मौन खड़े अधिकारी बढ़ा रहे शक का दायरा
इस महा-लापरवाही के सामने आने के बाद से ही पूरे जिले में हड़कंप मचा हुआ है लेकिन सबसे ज्यादा हैरान और आक्रोशित करने वाला रवैया जिला शिक्षा विभाग का है। ज्ञान के इस मंदिर में किताबों का ऐसा घोर अपमान देखकर जब मीडिया ने सीधे सवाल दागे, तो जिम्मेदार अधिकारी कुछ कहने से बचते नजर आए।
इस लापरवाही पर जब सीहोर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) शीलू शर्मा से सीधा सवाल किया गया तो उन्होंने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से साफ मना कर दिया। मीडिया के तीखे सवालों से DEO का भागना और रहस्यमयी मौन धारण करना सीधे तौर पर इशारा कर रहा है कि विभाग किसी बड़े घोटाले या अपनी घोर विफलता को छुपाने की पूरी कोशिश कर रहा है।
आखिर इस पाप का जिम्मेदार कौन?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सीहोर की जनता और जागरूक नागरिक प्रशासन से कई कड़े सवाल पूछ रहे हैं। क्या इन किताबों को किसी रद्दी व्यापारी को बेचने की साजिश थी, और पोल खुलने या पकड़े जाने के डर से इन्हें रातों-रात तारामंडल के बाहर ठिकाने लगा दिया गया? इस घोर लापरवाही के लिए आखिरकार जिम्मेदार कौन है?
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यह कोई मामूली प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि शिक्षा और देश के नौनिहालों के भविष्य का सरेआम अपमान है। आमजन ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। दोषियों को तत्काल सस्पेंड कर उन पर शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
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