शब्बीर अहमद भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के नतीजों को लेकर एक बड़ा संवैधानिक मोड़ सामने आया है। चुनाव में धांधली और नियमों की अनदेखी के आरोपों के बीच अब प्रदेश के नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों की सदस्यता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है, जिससे राज्य के सियासी गलियारों में अचानक खलबली मच गई है।

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आखिर क्या है राज्यसभा चुनाव का विवाद

साल 2026 के जून में मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरु हुई थी। कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया। उन्होंने 8 जून को नामांकन दाखिल किया। अगले दिन जांच के दौरान नामांकन रद्द कर दिया गया।

रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने हलफनामे में एक निजी आपराधिक शिकायत की जानकारी नहीं दी। यह शिकायत हैदराबाद की अदालत में लंबित बताई गई थी। अधिकारी ने इसे अधूरी जानकारी मानते हुए नामांकन निरस्त कर दिया।

इसके बाद चुनाव मैदान में केवल भाजपा के तीन उम्मीदवार रह गए। इनमें राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, उद्योगपति रजनीश कुमार अग्रवाल और भाजपा नेता महेश केवट शामिल थे। तीनों को 11 जून 2026 को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। जिसके बाद कांग्रेस ने इसी पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी है।

मीनाक्षी नटराजन का दांव: क्या गलत तरीके से खारिज हुआ नामांकन?

पूरा मामला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन द्वारा दायर की गई चुनाव याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान उनका नामांकन पत्र गलत और गैर-कानूनी तरीके से खारिज किया गया था।

इतना ही नहीं याचिका में यह गंभीर सवाल भी उठाया गया है कि नियम-कायदों को ताक पर रखकर बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट का नामांकन गलत तरीके से स्वीकार किया गया। इस याचिका के सामने आने के बाद से ही चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

जस्टिस बी.पी. शर्मा की बेंच का कड़ा रुख: किन-किन को थमाया नोटिस?

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस बी.पी. शर्मा की सिंगल बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा कदम उठाया है और कुछ पक्षों जैसे बीजेपी नेता तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल, महेश केवट, भारत निर्वाचन आयोग और राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है

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11 सिंतबर 2026: क्या निरस्त होंगे तीनों निर्वाचित उम्मीदवारों के चुनाव?

याचिकाकर्ता का दावा है कि यदि उनकी याचिका को अदालत स्वीकार कर लेती है तो इस चुनाव के तहत निर्वाचित हुए तीनों उम्मीदवारों का चुनाव निरस्त हो सकता है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या चुनाव आयोग और बीजेपी नेता कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रख पाएंगे या फिर राज्यसभा चुनाव का परिणाम ही पलट जाएगा? हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 तय की है। 11 सितंबर की तारीख मध्य प्रदेश की भावी राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकती है।

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