इंदर कुमार, जबलपुर। मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में चल रही बड़ी नियमितताओं को लेकर माननीय हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। राजधानी भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविध्यालय से संबंधित 82 प्राइवेट कॉलेजों में बड़े पैमाने पर चल रही नियम विरुद्ध गतिविधियों और धांधलियों के आरोपों पर हाई कोर्ट ने राज्य शासन, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय प्रबंधन और अन्य संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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एक्टिंग चीफ जस्टिस की बेंच में हुई सुनवाई
इस गंभीर मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ में हुई। न्यायालय ने याचिका में उठाए गए बिंदुओं और दस्तावेजों को प्राथमिक तौर पर गंभीर माना है। इस जनहित याचिका पर कोर्ट ने सभी अनावेदकों को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं मामले में अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।
याचिका में अनियमितताओं के गंभीर आरोप
यह याचिका जबलपुर निवासी भैयालाल द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त करीब 82 निजी कॉलेज तय मापदंडों और नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे हैं।
याचिका में कहा गया था कि इन 82 प्राइवेट कॉलेजों में बुनियादी ढांचे और अनिवार्य सुविधाओं की भारी कमी है। नियमों के विरुद्ध जाकर इन शिक्षण संस्थानों को मान्यता और संबद्धता दी गई या उनके संचालन की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरी अनियमितता को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
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10 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने मामले के सभी पक्षों को नोटिस थमाते हुए अगली सुनवाई से पहले अपना विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है। 10 अगस्त को होने वाली सुनवाई बेहद अहम होगी, क्योंकि इसमें विश्वविद्यालय और शासन के जवाब के बाद कोर्ट इन कॉलेजों के खिलाफ कड़े कदम उठा सकता है।
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