हेमंत शर्मा, इंदौर। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चल रहे दस्तक अभियान में लापरवाही सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिले में बच्चों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग के दौरान गलत जानकारी दर्ज करने और स्क्रीनिंग में गड़बड़ी पाए जाने पर 20 एएनएम के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभागीय समीक्षा में लापरवाही सामने आने के बाद सभी 20 एएनएम को तीन-तीन दिन का वेतन काटने के साथ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
5 साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग में सामने आई लापरवाही
दस्तक अभियान के तहत 0 से 5 साल तक के बच्चों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जा रही है। अभियान के दौरान एएनएम द्वारा बच्चों का स्वास्थ्य आकलन कर उसकी जानकारी डिजिटल सर्वे सिस्टम में दर्ज की जाती है। विभागीय समीक्षा में पाया गया कि कुछ एएनएम ने बच्चों का स्वास्थ्य आकलन सही तरीके से नहीं किया और डिजिटल सिस्टम में गलत जानकारी दर्ज कर दी। इस लापरवाही का सीधा असर बच्चों की सही पहचान और जरूरत पड़ने पर उन्हें विशेषज्ञ उपचार के लिए रेफर करने की प्रक्रिया पर पड़ सकता था।
गलत एंट्री सिर्फ आंकड़ों की गड़बड़ी नहीं, बच्चे के इलाज पर भी असर
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक डिजिटल सिस्टम में दर्ज जानकारी के आधार पर बच्चों का स्वास्थ्य वर्गीकरण और फॉलोअप तय किया जाता है। ऐसे में अगर किसी बच्चे का स्वास्थ्य आकलन गलत दर्ज हो जाए तो गंभीर कुपोषण, एनीमिया या दूसरी स्वास्थ्य समस्या वाला बच्चा समय पर पहचान से बाहर हो सकता है। यानी यहां मामला सिर्फ एक ऑनलाइन एंट्री गलत होने का नहीं, बल्कि बच्चे की बीमारी की समय पर पहचान और उपचार की प्रक्रिया से जुड़ा है।
14 जुलाई से 31 अगस्त तक 3.5 लाख से ज्यादा बच्चों की स्क्रीनिंग
दस्तक अभियान के तहत 14 जुलाई से 31 अगस्त तक जिले में 3.5 लाख से ज्यादा बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। जिसके तहत एएनएम घर-घर और आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों की जांच कर डिजिटल सिस्टम में जानकारी दर्ज करती हैं। इसी रिकॉर्ड के आधार पर बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आगे रेफर किया जाता है।
20 ANM पर कार्रवाई, 3 दिन का वेतन काटा
लापरवाही सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 20 एएनएम के खिलाफ कार्रवाई की है। सभी को तीन दिन का वेतन काटने के साथ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने साफ संकेत दिया है कि बच्चों की स्क्रीनिंग जैसे महत्वपूर्ण अभियान में लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
सुधार नहीं हुआ तो दो साल की वेतनवृद्धि रुकेगी
मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हरणी की ओर से भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल सिस्टम में एंट्री की समीक्षा के दौरान गड़बड़ी मिलने पर संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित कर्मचारियों की दो वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अब शहरी और ग्रामीण इलाकों की ANM की निगरानी
यह कार्रवाई सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है। विभाग की ओर से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की एएनएम के काम की समीक्षा की गई है।स्वास्थ्य विभाग अब डिजिटल सिस्टम में दर्ज स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य वर्गीकरण की जानकारी को गंभीरता से जांच रहा है, ताकि किसी बच्चे की गलत एंट्री के कारण उसकी स्वास्थ्य जरूरत प्रभावित न हो।
जब 3.5 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग हो रही है, तो हर एंट्री की सटीकता कितनी जरूरी?
बच्चों की स्क्रीनिंग किसी सामान्य सर्वे की तरह नहीं है। इसी जांच से यह पता चलता है कि बच्चे को आगे किस तरह की स्वास्थ्य सुविधा की जरूरत है।ऐसे में डिजिटल सिस्टम में गलत जानकारी दर्ज होना सीधे स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
अब विभाग ने कार्रवाई कर सख्त संदेश जरूर दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की स्क्रीनिंग के बीच गलत एंट्री रोकने और हर बच्चे का सही स्वास्थ्य आकलन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था कितनी मजबूत है?फिलहाल 20 ANM पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन विभाग की असली परीक्षा यह सुनिश्चित करने की है कि अगली समीक्षा में बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी लापरवाही दोबारा सामने न आए।
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