इंदर कुमार, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सतना जिले में 25 वन सुरक्षा गार्डों का 7 साल से अटका हुआ बकाया भुगतान न किए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के पिछले आदेशों के बावजूद मजदूरी का भुगतान न होने पर अदालत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भारी नाराजगी जताई और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को 18 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश जारी किया है।
‘अधिकारी सनक और मनमर्जी से पैसा बर्बाद न करें’ – HC
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी जनता के पैसे के मालिक नहीं हैं, वे केवल उसके संरक्षक हैं। वे अपनी सनक या मनमर्जी से सरकारी धन की बर्बादी नहीं कर सकते।
सतना जिले में कोविड काल और उससे पहले 25 वन सुरक्षा गार्डों ने सेवाएं दी थीं, लेकिन पिछले 7 सालों से उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।
हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी जब वन विभाग के जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया, तो कोर्ट ने वन बल प्रमुख को तलब कर जवाब तलब किया है।
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