शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत 27 हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी 34 लाख परिवारों तक पानी न पहुंचने के खुलासे पर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट को ढाल बनाकर कांग्रेस ने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर ‘महाघोटाले’ के आरोप लगाए हैं। वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद और हताशा से भरा बताया है।
कांग्रेस का तीखा हमला: ‘गले-गले तक भ्रष्टाचार में डूबी है सरकार’
मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता जितेंद्र मिश्रा ने सरकार पर चौतरफा घोटाले का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में इस वक्त तमाशा चल रहा है। कैग की रिपोर्ट से साफ है कि सरकार गले-गले तक भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। नल-जल योजना के माध्यम से जनता के पैसों का खुला घोटाला किया जा रहा है। प्रदेश में सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि हर मोर्चे पर धांधली है- चाहे नीट परीक्षा हो, स्कूल बंद होने का मामला हो या प्रधानमंत्री आवास योजना हो। मोहन सरकार के कार्यकाल में सिर्फ घोटाला ही घोटाला हो रहा है।
भाजपा का पलटवार: ‘आरोप लगाना आसान, 77 लाख घरों तक पहुंचाया पानी’
कांग्रेस के हमलावर रुख पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मंजरी जैन ने पलटवार करते हुए इसे विपक्ष की बौखलाहट करार दिया। उन्होंने कहा कि आरोप लगाना बहुत सरल काम है। जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश के हर घर में नल से जल पहुंचाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड काम करते हुए 77 लाख से अधिक घरों तक पानी पहुंचाया जा चुका है और जो बाकी बचे घर हैं, वहां भी जल्द काम पूरा हो जाएगा। कांग्रेस के पास आए दिन इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाने के अलावा कोई काम नहीं बचा है, वे सिर्फ जनता में भ्रम फैला रहे हैं।
आखिर क्या कहती है CAG की रिपोर्ट?
विधानसभा के पटल पर रखी गई CAG की ऑडिट रिपोर्ट में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले 5 वर्षों में 27 हजार करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद दिसंबर 2024 तक 100% लक्ष्य के मुकाबले केवल 60.90% यानि 77 लाख ग्रामीण परिवारों को ही कवर किया जा सका।
विदिशा के हिनौतिया प्रोजेक्ट, मोहनपुरा और पायली प्रोजेक्ट में टेंडर नियमों में हेरफेर कर ठेकेदारों को लगभग 40 करोड़ रुपये से अधिक का अनुचित फायदा पहुंचाने का दावा किया गया है। नियमों की अनदेखी के चलते सरकारी खजाने पर करीब 176 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। इसी ऑडिट रिपोर्ट के उजागर होने के बाद से सूबे का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।
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