रवि रायकवार, दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया में टीएल बैठक के दौरान कलेक्टर स्वपनिल वानखड़े और दतिया ग्रामीण तहसीलदार अमित दुबे के बीच हुई बहस के बाद उनका तबादला किए जाने का मामला चर्चा में है। तहसीलदार अमित दुबे ने रविवार को फेसबुक पर शायराना अंदाज में पोस्ट करते हुए लिखा कि उनकी “बनती ही नहीं थी कभी सरदार के साथ, इसलिए फासला बढ़ता गया दरबार के साथ।” इस पोस्ट को बैठक में हुए विवाद और बाद में हुए तबादले से जोड़कर देखा जा रहा है।

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दरअसल, पूरा मामला 17 अगस्त का है जहां बैठक में फार्मर आईडी की पेंडेंसी को लेकर कलेक्टर स्वपनिल वानखड़े और तहसीलदार अमित दुबे के बीच बहस हुई थी। दतिया ग्रामीण क्षेत्र में 500 से अधिक किसानों की फार्मर आईडी लंबित बताई गई थी। कलेक्टर ने तहसीलदार से पेंडेंसी को लेकर सवाल किया और काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।

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तहसीलदार का कहना था कि वे किसानों को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, इसलिए एक-एक किसान की जांच के बाद ही आईडी बनाई जाएगी और इसमें समय लगेगा। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। मामला इतना बढ़ा कि कलेक्टर ने तहसीलदार को बैठक से बाहर जाने के लिए कह दिया।

अगले दिन अमित दुबे को दतिया ग्रामीण तहसीलदार के पद से हटा दिया गया। अब सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। वर्तमान में अमित दुबे  भांडेर तहसील में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के रूप में पदस्थ हैं। वहीं कलेक्टर ने इस शायराना अंदाज को गलत बताया है।

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