मध्य प्रदेश में पहली ही बारिश ने न सिर्फ जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया, बल्कि शासन-प्रशासन के करोड़ों रुपए के विकास के खोखले दावों को बहा दिया। सतना, सीहोर और बड़वानी से ऐसी घटनाएं सामने आईं जिसने ओवरब्रिज, सड़क और पुलिया निर्माण में भ्रष्टाचार के खेल को उजागर कर दिया। 

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा सतना का बगहा बाईपास रोड, दो साल में ही जर्जर हुई सड़क 

अनमोल मिश्रा, सतना। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक बार फिर बुनियादी ढांचे के निर्माण में बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। महज दो साल पहले निर्माण एजेंसी NH PWD ने लगभग 350 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्माण ठेकेदार श्री जी इंफ्रा के द्वारा l50 किलोमीटर लंबा बगहा बाईपास रोड तैयार किया था, जो आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

स्थानीय स्तर पर किए गए दावों और वीडियो में दिख रही सड़क की स्थिति से यह साफ जाहिर होता है कि निर्माण कार्य में मानकों की जमकर अनदेखी की गई है। सड़क जगह-जगह से जर्जर हो चुकी है, जिससे यह मार्ग अब सफर के लायक न रहकर हादसों को दावत देने वाला एक खतरनाक पॉइंट बन गया है।

इस बदहाली को लेकर अब सियासी पारा भी गरमा गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक ट्वीट के जरिए इस जर्जर बाईपास रोड की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए सरकार को सीधे आड़े हाथों लिया है। विपक्ष का आरोप है कि इतने कम समय में सड़क का इस तरह टूट जाना और पुलों में दरारें व गड्ढे दिखना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का नतीजा है।

स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस रोड पर सुरक्षा के न्यूनतम मानकों जैसे उचित बैरिकेड्स, सर्विस लेन, संकेतक और लाइटिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। सोशल मीडिया पर सड़क की खस्ताहाल स्थिति वायरल होने के बाद अब तक निर्माण एजेंसी और ठेकदार नींद नहीं टूटी है,कांग्रेस नेता के बड़े आरोप है और अब सवाल कर रहे कि  दो साल से लगातार टोल टैक्स वसूलने के बावजूद सड़क की सुरक्षा और रखरखाव पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया? विपक्ष और आम जनता अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों एवम कंस्ट्रक्शन कंपनी पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।

निर्माणाधीन ओवरब्रिज में लापरवाही, रहवासियों ने किया सद्बुद्धि हवन

अनिल मालवीय, सीहोर। जिला मुख्यालय के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के समीप निर्माणाधीन ओवरब्रिज में बरती जा रही कथित लापरवाही और सर्विस रोड का निर्माण न होने से नाराज हाउसिंग बोर्ड, चाणक्यपुरी कॉलोनी के रहवासियों का सब्र आखिरकार टूट गया। रविवार दोपहर को सैकड़ों की संख्या में क्षेत्रवासी सड़कों पर उतर आए और उन्होंने ओवरब्रिज के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम कर दिया।

इस दौरान आक्रोशित जनता ने ब्रिज कॉर्पोरेशन के अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन को अनोखा रूप देते हुए रहवासियों ने बीच सड़क पर ही जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ‘सद्बुद्धि’ के लिए बकायदा यज्ञ-हवन भी किया।

आवेदन-निवेदन सब बेअसर, मजबूरी में थामना पड़ा आंदोलन का रास्ता

क्षेत्रीय नागरिकों ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर पिछले लंबे समय से परेशान हैं। अपनी जायज मांगों को लेकर रहवासियों द्वारा कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित में आवेदन-निवेदन किया गया। इतना ही नहीं, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी इस गंभीर समस्या से बार-बार अवगत कराया गया और गुहार लगाई गई, लेकिन सत्ता और प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

रहवासियों का दर्द है कि हमने हर प्रशासनिक फोरम पर अपनी बात रखी, जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटे, लेकिन सिर्फ खोखले आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। जब हमारी जायज मांग को पूरी तरह अनसुना कर दिया गया, तो मजबूरी में हमें चक्काजाम जैसा उग्र कदम उठाना पड़ा।

सर्विस रोड न होने से मंडरा रहा है हादसों का साया

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ओवरब्रिज निर्माण की कछुआ चाल और सर्विस रोड के अभाव में पूरी कॉलोनी का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। धूल के गुबार, कभी फिसलन भी कीचड़ और अधूरे पड़े निर्माण कार्य के कारण आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। सर्विस रोड न होने से यहां 24 घंटे भीषण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

20 लाख में बन रही पुलिया में घटिया निर्माण

समीर शेख, बड़वानी। पानसेमल के ग्राम मल्फा के चिचवानिया रोड पर लगभग 20 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन पुलिया के कार्य को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीण जितेंद्र पाटील ने बताया कि पुलिया निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है और निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की जा रही है।

जितेंद्र पाटील के अनुसार, निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पुलिया की मजबूती और टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने तथा दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही आगे का कार्य कराया जाए।

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