शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई 11 मौतों के दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन इस त्रासदी के पीछे का एक ऐसा चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसने शासन और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2021 में मुरैना जिले में जब जहरीली शराब से 24 लोगों की मौत हुई थी तब वहां की कमान संभाल रहे एसपी कोई और नहीं बल्कि अनुराग सुजानिया ही थे और आज सागर में जब 11 लोगों की जान चली गई तब भी जिले के एसपी अनुराग सुजानिया ही हैं।
इस चौकाने वाले कनेक्शन का आरोप कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने लगाया है। जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और तीखे सवाल दागते हुए आबकारी मंत्री व डीजीपी के इस्तीफे की मांग की है।
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‘क्या मध्य प्रदेश में माफिया और अफसरों की साठगांठ चल रही है?’
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने राजधानी भोपाल में प्रेस वार्ता कर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मुरैना के भयावह कांड के 5 साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने कोई सबक नहीं सीखा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्या वजह है कि जिस अफसर के कार्यकाल में मुरैना में 24 लोगों की चिताएं जली थीं, उन्हीं के कंधों पर दोबारा सागर जैसी संवेदनशील जगह की जिम्मेदारी सौंप दी गई?
कुणाल चौधरी ने सीधा आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या मध्य प्रदेश में शराब माफियाओं और प्रशासनिक नुमाइंदों के बीच कोई गहरी साठगांठ चल रही है? अगर नहीं, तो एक ही ढर्रे पर बार-बार बेकसूर लोगों की जान क्यों जा रही है?
डीजीपी और आबकारी मंत्री के इस्तीफे की उठी मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि सागर कांड कोई दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से हुआ एक सामूहिक हत्याकांड है। सरकार लगातार अपनी नाकामियों को छुपाने और जवाबदेही से भागने की कोशिश कर रही है। निचले स्तर के चंद कर्मचारियों को सस्पेंड कर इतिश्री कर ली जाती है, जबकि असली जिम्मेदार आला अधिकारी मलाईदार पदों पर बैठे रहते हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और नैतिकता के आधार पर प्रदेश के आबकारी मंत्री और पुलिस महानिदेशक तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
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मामले में अब तक की कार्रवाई और सरकार का पक्ष
सागर के बंडा क्षेत्र में हुई इस भीषण त्रासदी में अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोग बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में भर्ती हैं। विपक्ष के तीखे हमलों के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में ऐसी घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सख्त जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि इसमें शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
5 अधिकारी-कर्मचारी निलंबित
लापरवाही बरतने पर सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते, बंडा आबकारी उपनिरीक्षक रोशनी उरेते, बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र कुशवाहा और गूगरा चौकी प्रभारी (ASI) पूरन सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी को ग्वालियर अटैच किया गया है।
30 आरोपियों पर FIR, 10 हिरासत में
बंडा और विनायक थाने में जहरीली शराब की तस्करी और बिक्री से जुड़े 30 नामजद आरोपियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया गया है, जिनमें से 10 से अधिक आरोपियों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
यूपी से जुड़े तार
शुरुआती जांच में इस अवैध और जहरीली शराब के नेटवर्क के तार पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जुड़े होने का खुलासा हुआ है। इलाके की 6-7 शराब दुकानों को सील कर सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
सख्त जांच और पीड़ितों को राहत
सरकार ने पीड़ितों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं। वहीं पुलिस की टीमें उत्तर प्रदेश से जुड़े शराब तस्करी के नेटवर्क को खंगाल रही हैं और अवैध ठिकानों पर लगातार छापेमारी जारी है।
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