अजयारविंद नामदेव, शहडोल। शहडोल अपने अलग-अलग कारनामों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहता है, लेकिन इस बार जो तस्वीर सामने आई है, उसने स्वास्थ्य व्यवस्था और एंबुलेंस के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस एंबुलेंस का काम मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए दौड़ना है, वही एंबुलेंस यहां स्कूल वैन के रूप में दौड़ती नजर आई। जिसका वीडियो भी सामने आया है। अब सवाल यह है कि जब मरीज एंबुलेंस के इंतजार में जिंदगी और मौत से जूझते हैं, तब आखिर एंबुलेंस का इस्तेमाल स्कूली बच्चों को ढोने के लिए कैसे हो रहा है।

संभागीय मुख्यालय शहडोल में सर्किट हाउस के पास एक निजी स्कूल के बच्चों को एंबुलेंस के जरिए स्कूल पहुंचाया जा रहा था। एंबुलेंस में एक साथ कई स्कूली बच्चे बैठे दिखाई दे रहे हैं, जबकि वाहन का इस्तेमाल सामान्य तौर पर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने के लिए किया जाता है।

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इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति की नजर एंबुलेंस पर पड़ी तो उसने इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, वीडियो में एंबुलेंस के भीतर स्कूली बच्चे नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर मरीजों के लिए उपलब्ध एंबुलेंस का इस्तेमाल स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने के लिए किस आधार पर किया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल इसलिए भी खड़ा हो रहा है क्योंकि शहडोल में समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने को लेकर मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियों की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में यदि एंबुलेंस का इस्तेमाल गैर-चिकित्सकीय कार्यों के लिए किया जा रहा है तो आपात स्थिति में मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, एंबुलेंस किस संस्था की है, बच्चों को किसके निर्देश पर ले जाया जा रहा था और इसके लिए अनुमति थी या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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