शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर मोहन यादव सरकार द्वारा कदम आगे बढ़ाते ही सूबे में एक नया और बड़ा वैचारिक विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद का मुख्य केंद्र ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ (Live-in Relationship) से जुड़े अधिकार हैं। सरकार द्वारा यूसीसी को लेकर जारी किए गए सुझाव के प्रारूप (Draft) में लिव-इन रिलेशनशिप और उससे जुड़े अधिकारों का जिक्र किया गया है। जिस पर हिंदूवादी संगठनों, कांग्रेस और मुस्लिम नेताओं ने तीखी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। हिंदूवादी संगठनों ने इसे भारतीय संस्कृति पर हमला बताकर आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस ने सवाल किया कि राम-राम करने वाले बीजेपी की सरकार यह बताए कि सीताराम के पवित्र बंधन के आईने में देख आखिर लिव-इन रिलेशनशिप को क्या नाम, क्या मान्यता देंगे?

क्या है विवाद की मुख्य वजह? फार्म का ‘कॉलम नंबर-11’

दरअसल मध्यप्रदेश सरकार ने 22 जून तक UCC कानून को लेकर सुझाव मांगे हैं। इसके लिए एक लिंक भी जारी की गई है। लिंक में दिए गए फार्म में लिविंग रिलेशनशिप से जुड़े मामले को लेकर राय मांगी है। फार्म के 11 नंबर के कॉलम में सरकार ने लिखा कि क्या यूसीसी में लिव इन संबंधों से जन्मे बच्चों के उत्तराधिकार और भरण पोषण अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रावधान करना चाहिए?

‘यह दासी प्रथा जैसा, संस्कृति दूषित न करे सरकार’— हिंदूवादी संगठन

इस प्रावधान को लेकर संस्कृति बचाओ मंच और हिंदू उत्सव समिति ने कड़ा विरोध जताया है। संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने दो टूक कहा कि सनातन परंपरा में केवल विवाहित पत्नी को ही धार्मिक और सामाजिक संस्कारों में भागीदारी का अधिकार है। उन्होंने तीखा तर्क देते हुए कहा कि पहले राजा-महाराजा और धनाड्य वर्ग ‘दासी’ के रूप में अतिरिक्त महिला से संबंध रखते थे, समाज में उन्हें क्या कहा जाता है, यह सब जानते हैं। पश्चिमी और भोगवादी विचारधारा को अपनाकर हमारी सांस्कृतिक धरोहर को दूषित करने का काम नहीं होना चाहिए।

‘राम-राम करने वाली सरकार सीताराम के आईने में जवाब दे’— कांग्रेस

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे ‘दूषित मानसिकता’ करार दिया है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने सवाल उठाया, जो भाजपा राम का नाम लेकर राजनीति करती है, वह बताए कि भगवान श्रीराम और माता सीता के पवित्र बंधन के आईने में इस लिव-इन रिलेशनशिप को क्या नाम और क्या मान्यता देगी? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समाज को भोगवादी और वासनावादी बनाना चाहती है, जिसकी अनुमति हमारे धर्मग्रंथ और कामसूत्र के रचयिता महर्षि वात्स्यायन भी नहीं देते।

इस्लाम में ऐसे संबंधों को मान्यता नहीं- आरिफ मसूद

मामले को लेकर कांग्रेस विधायक और कई मुस्लिम संस्थाओं से जुड़े आरिफ मसूद ने भी एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने लोगों से अपील की है कि यूसीसी कानून को लेकर लोग ज्यादा से ज्यादा सुझाव दें। ताकि गैर जरूरी कानून के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जा सके। इसके अलावा उन्होंने यह भी साफ कहा कि इस्लाम में लिविंग रिलेशनशिप को मान्यता नहीं दी गई है। लिहाजा हर मुस्लिम को इसका विरोध करना चाहिए।

‘यह सिर्फ सुझाव है, भावनाओं का रखेंगे सम्मान’— बीजेपी

चौतरफा हमलों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सरकार का बचाव किया है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि देश की एकता के लिए यूसीसी बेहद जरूरी कानून है और कांग्रेस हमेशा की तरह तुष्टिकरण की राजनीति के तहत इसका विरोध कर रही है। लिव-इन रिलेशनशिप के विवाद पर उन्होंने साफ किया कि सरकार ने अभी सिर्फ राय और सुझाव मांगे हैं। अंतिम ड्राफ्ट तैयार करते समय समाज के सभी वर्गों की भावनाओं और भारतीय मूल्यों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m