शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में सोमवार को एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यूसीसी (UCC) समिति की ओर से 3 खंडों वाली अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी गई है। इस रिपोर्ट के सामने आते ही साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश सरकार अब उत्तराखंड की तर्ज पर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

समिति ने यह रिपोर्ट हवा-हवाई दावों पर नहीं बल्कि प्रदेश के 9.58 लाख से अधिक लोगों से मिले जन-परामर्श और सुझावों के गहन अध्ययन के बाद तैयार की है।

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404 धाराएं और 7 अनुसूचियां: समझिए विधेयक का पूरा प्रारूप

मुख्यमंत्री को सौंपी गई इस रिपोर्ट के दूसरे खंड में समान नागरिक संहिता विधेयक (UCC Bill) का पूरा कानूनी प्रारूप तैयार किया गया है। इस ड्राफ्ट में शामिल प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:

विधेयक की रूपरेखा: यूसीसी विधेयक के इस प्रारूप को 4 भागों, 404 धाराओं और 7 अनुसूचियों में विभाजित किया गया है।

इन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित: इस पूरी रिपोर्ट में नागरिकों के सामाजिक और पारिवारिक जीवन से जुड़े बेहद संवेदनशील विषयों जैसे— विवाह (Marriage), तलाक (Divorce), भरण-पोषण (Maintenance), उत्तराधिकार (Succession), दत्तक ग्रहण (Adoption) और तेजी से बढ़ते लिव-इन संबंधों (Live-in Relationships) को लेकर कड़े प्रावधान, नियम और कानूनी सुझाव शामिल किए गए हैं।

अनुसूचित जनजाति (ST) को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने का सुझाव

इस रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी सिफारिश आदिवासियों से जुड़ी है। समिति ने मध्य प्रदेश की जनसांख्यिकी को ध्यान में रखते हुए अनुसूचित जनजातियों (ST) को समान नागरिक संहिता (UCC) के दायरे से पूरी तरह बाहर रखने की सिफारिश की है। इस कदम से आदिवासी समाज की पारंपरिक रूढ़ियों, प्रथाओं और उनकी अनूठी संस्कृति को कानूनी तौर पर सुरक्षा मिलना तय माना जा रहा है।

मानसून सत्र में पेश हो सकता है ऐतिहासिक बिल, विधि विभाग को भेजी गई रिपोर्ट

रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सरकार अब इसे अमलीजामा पहनाने की तैयारी में जुट गई है। इस अंतिम रिपोर्ट को तत्काल विधि विभाग को भेज दिया गया है। विधि विभाग द्वारा इसका गहन कानूनी परीक्षण किया जाएगा, जिसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए मंत्रिपरिषद के सामने रखा जाएगा।

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सूत्रों और सरकार की तैयारियों के मुताबिक सब कुछ तय समय पर होने के बाद आगामी मानसून सत्र में इस ऐतिहासिक विधेयक को मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद जटिल और संवेदनशील काम को पूरी समय-सीमा के भीतर संजीदगी से पूरा करने के लिए समिति की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और समिति के सभी सम्मानित सदस्यों का सहृदय आभार व्यक्त किया है।

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