संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी द्रोणिका के चलते जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में भारी बारिश का दौर जारी है। बारिश के रौद्र रूप और उफान को देखते हुए सतना जिले में 2 और 3 सितंबर को सभी स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
अगले 24 घंटे में इन जिलों में आफत की बारिश, मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग भोपाल के अनुसार, पूर्वी हिस्से में बने मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण अगले 24 घंटों में सीधी, पन्ना, कटनी, उमरिया, डिंडौरी, मंडला और सिवनी जिलों में भारी बारिश हो सकती है, जहां 4 इंच से ज्यादा पानी गिरने का अनुमान है। वहीं विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, जबलपुर, छतरपुर, सतना, रीवा, मऊगंज, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। भोपाल सहित कई अन्य जिलों में भी हल्की से तेज बारिश का दौर बना रहेगा।
बंगाल की खाड़ी में सिस्टम एक्टिव, अगले 3 दिनों का प्रेडिक्शन
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय है और दक्षिणी हिस्से से मानसून द्रोणिका गुजर रही है। इन परिस्थितियों से अगले तीन दिनों में सिस्टम और मजबूत होगा। 2 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश, 3 सितंबर को भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, नर्मदापुरम, रीवा और जबलपुर संभाग में बारिश की तीव्रता बढ़ेगी। वहीं 4 और 5 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश में तेज से भारी बारिश होने के आसार जताए गए हैं।
चित्रकूट में मंदाकिनी उफान पर, रामघाट की 400 दुकानें डूबीं; भदभदा के खुलेंगे गेट
सतना और चित्रकूट में बारिश व बाढ़ से हालात सबसे ज्यादा बिगड़ गए हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे मंगलवार को रामघाट की करीब 400 दुकानें और 20 से 25 होटल पानी में डूब गए। उधर, लगातार बारिश से प्रदेश के जलाशयों की स्थिति सुधरी है। भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर 1666.50 फीट पहुंच चुका है और यह फुल टैंक लेवल से महज 0.30 फीट खाली है। तालाब के पूरा भरते ही भदभदा बांध के गेट खोल दिए जाएंगे।
प्रदेश में अभी भी सामान्य से 11% कम बारिश
प्रदेश में अब तक कुल 707.1 मिलीमीटर (27.8 इंच) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य 31.2 इंच के मुकाबले 3.1 इंच कम है। वर्तमान में पूरे प्रदेश में सामान्य से 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिसमें पूर्वी मध्य प्रदेश में 5 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 16 प्रतिशत की कमी है। जून में हुई 14 प्रतिशत की शुरुआती कमी के कारण जुलाई और अगस्त में हुई अच्छी बारिश के बावजूद कुल आंकड़ा पूरे मानसून सीजन के सामान्य औसत (37.3 इंच) से पीछे बना हुआ है।
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