रोहित कश्यप, मुंगेली। जिले के समग्र शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला विभाग के भीतर से ही सामने आया है। कार्यालय में पदस्थ तीन सहायक कार्यक्रम समन्वयकों (एपीसी) ने संयुक्त रूप से जिला कलेक्टर एवं पदेन जिला मिशन संचालक, समग्र शिक्षा मुंगेली को विस्तृत शिकायती पत्र सौंपकर कार्यालय में व्याप्त कथित अव्यवस्थाओं, अनियमितताओं और जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी) के तानाशाहीपूर्ण व्यवहार की शिकायत की है। शिकायत में न केवल कार्यालयीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, बल्कि कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार, विभागीय कार्यों में बाधा और शासन के निर्देशों की अनदेखी जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शिकायत केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रही। इसकी प्रतिलिपि राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा, रायपुर के आयुक्त, प्रबंध संचालक, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है। ऐसे में मामला अब राज्य स्तर तक पहुंच चुका है और विभागीय हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है।
बिना औपचारिक प्रभार के कराया जा रहा काम
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें आज तक उनके कार्यक्षेत्र का विधिवत प्रभार नहीं सौंपा गया। पूर्व जिला मिशन समन्वयक के कार्यकाल में केवल कार्य सुविधा के लिए विकासखंडों का आवंटन किया गया था, लेकिन उसका कभी औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ। इसके बावजूद वे लगातार अपने-अपने खंडों से जुड़े कार्यों का निर्वहन करते रहे।
अब आरोप है कि बिना किसी सूचना या सहमति के अन्य कर्मचारियों द्वारा उन्हीं खंडों से संबंधित फाइलें संचालित की जा रही हैं। इस संबंध में कई बार जिला मिशन समन्वयक और जिला शिक्षा अधिकारी को मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

बंद आलमारियों में कैद हैं जरूरी दस्तावेज
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विभाग के महत्वपूर्ण अभिलेख, दस्तावेज और रिकॉर्ड बंद आलमारियों में रखे गए हैं, जिन तक संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की पहुंच नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती, जिससे कार्यालयीन कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार कई बार इस समस्या से भी अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
संसाधनों की कमी से प्रभावित हो रहे विभागीय कार्य
तीनों एपीसी ने आरोप लगाया है कि उन्हें आज तक संबंधित खंडों के पुराने अभिलेख, फाइलें, आलमारियां और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसके कारण नियमित प्रशासनिक कार्यों के संचालन में लगातार परेशानी आ रही है।
स्कूल निरीक्षण तक पर रोक लगाने का आरोप
शिकायती पत्र में एक और गंभीर मुद्दा स्कूल निरीक्षण से जुड़ा है। एपीसी का कहना है कि उनके प्रमुख दायित्वों में विद्यालयों का निरीक्षण शामिल है, लेकिन जिला मिशन समन्वयक द्वारा उन्हें निरीक्षण करने से रोका जाता है। इतना ही नहीं, निरीक्षण के लिए कोई वार्षिक या साप्ताहिक कार्यक्रम भी तैयार नहीं किया जाता।
उनका कहना है कि इससे विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही है और शासन की मंशा के अनुरूप निरीक्षण व्यवस्था संचालित नहीं हो पा रही है।
समीक्षा बैठकों का भी नहीं हो रहा आयोजन
शिकायत में शासन के निर्देशों की अनदेखी का भी आरोप लगाया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद नियमित साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित नहीं की जा रही हैं। इससे कार्यों की समीक्षा, समन्वय और समस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
डीएमसी पर अभद्र व्यवहार और तानाशाही का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने जिला मिशन समन्वयक अशोक सोनी के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिला एवं विकासखंड स्तर के कर्मचारियों से अभद्र भाषा में बात की जाती है तथा तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाया जाता है। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है और कार्यालय में स्वस्थ कार्यसंस्कृति नहीं बन पा रही है।
कई बार मौखिक शिकायत, लेकिन नहीं निकला समाधान
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन सभी समस्याओं को लेकर कई बार मौखिक रूप से अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन और टाल-मटोल ही मिला। परिणामस्वरूप कार्यालय में भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसका सीधा असर विभागीय कार्यों की गुणवत्ता और गति पर पड़ रहा है।
कलेक्टर से जांच और हस्तक्षेप की मांग
इन सभी आरोपों के आधार पर सहायक कार्यक्रम समन्वयक प्रदीप कुमार उपाध्याय, तीरथ प्रसाद बड़गईयां और लेखराम साहू ने जिला कलेक्टर कुंदन कुमार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कार्यालयीन व्यवस्था का परीक्षण करने तथा आवश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप कर नियमानुसार व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
शिक्षा व्यवस्था संभालने वाला कार्यालय खुद सवालों के घेरे में
समग्र शिक्षा कार्यालय जिले में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता, मॉनिटरिंग और विभिन्न योजनाओं के संचालन का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में यदि उसी कार्यालय के भीतर प्रभार को लेकर भ्रम, रिकॉर्ड प्रबंधन में कथित लापरवाही, निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल, समीक्षा बैठकों का अभाव और कर्मचारियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार जैसे आरोप सामने आते हैं, तो यह केवल एक कार्यालय का मामला नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और राज्य परियोजना कार्यालय पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
शिकायत पत्र

विभाग का पक्ष
इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी एल.पी. डाहिरे तथा जिला मिशन समन्वयक अशोक सोनी का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया गया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक दोनों अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।
सप्ताहभर तक गोपनीय रही शिकायत, अब आई सामने
गौरतलब है कि यह शिकायत करीब एक सप्ताह पहले की गई थी। चूंकि मामला विभागीय शिकायत से जुड़ा था, इसलिए इसे गोपनीय रखा गया था। हालांकि जिला कलेक्टर कार्यालय से होते हुए जब शिकायत राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा तक पहुंच गई, तब यह मामला सार्वजनिक हो सका।
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