संजय पाटीदार, भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम रिहायशी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। हजारों व्यापारिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। लेकिन अब नगर निगम के निशाने पर निजी स्कूल भी आ गए हैं।

शहर के कई निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि वे रिहायशी क्षेत्र में स्कूल कैसे संचालित कर रहे हैं। नोटिस मिलते ही स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है। उनका कहना है कि अगर स्कूल बंद हुए तो लाखों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी, हजारों शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे और अभिभावकों के सामने भी बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।

भोपाल नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में रिहायशी इलाकों में संचालित कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। शहर के 21 जोनों में टीमें सर्वे कर रही हैं और अब तक हजारों नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब इसी कार्रवाई की जद में निजी स्कूल भी आ गए हैं। कई स्कूलों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है कि वे रहवासी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि क्यों चला रहे हैं। नोटिस मिलने के बाद स्कूल संचालकों में चिंता बढ़ गई है।

प्राइवेट स्कूल वेलफेयर संचालक मंच मोनू तोमर ने कहा कि स्कूलों को नोटिस दिए जा रहे हैं। मंत्री से भी इसके लिए हम मिले हैं। स्कूलों को इस तरह बंद किया जाएगा तो लाखों बच्चों के भविष्य का क्या होगा? क्या सरकार इन स्कूलों के बच्चों को अपने स्कूल में एडमिशन दे पाएगी। 

निजी स्कूलों को नोटिस दिए जाने पर अभिभावक भी परेशान हैं। संरक्षक विवेक शुक्ला ने कहा कि नगर निगम जो कार्रवाई कर रहा है उसमें  मानवीय दृष्टिकोण रखना चाहिए। एक अभिभावक  यही सोचता हैं जो छोटे स्कूल हो वो घर के आसपास रहे। हमारी यह मांग है कि की छोटे स्कूलों को राहत दी जानी चाहिए। 

भोपाल में निजी स्कूलों को जारी हुए इन नोटिसों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने की जिम्मेदारी है,तो दूसरी तरफ लाखों छात्रों की पढ़ाई और हजारों शिक्षकों के रोजगार का सवाल। अब सभी की निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं कि बच्चों के भविष्य और नियमों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा।

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