रेणु अग्रवाल, धार। भोजशाला को मंदिर घोषित करने और पूजा के बाद अब वहां नमाज को लेकर विवाद गहरा गया है। मुस्लिम पक्ष ने जिला प्रशासन की उपलब्ध करवाई गई जमीन पर नमाज पढ़ने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जो जगह उन्हें दी गई है वह 2 किलोमीटर दूर है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने परिसर के पास में जमीन देने के लिए कहा था। इस पूरे मामले की अंतिम सुनवाई 5 अगस्त को होगी। 

दरअसल, जिला प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच आज बैठक हुई। जिसके बाद जिला प्रशासन ने हर शुक्रवार को 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज के लिए चालीस पीर परिसर जगह देने का फैसला किया। प्रशासन का कहना है कि बैठक में चर्चा के बाद धार के ग्राम मालीवाड़ा की सर्वे क्रमांक 664 की जमीन, जो “चालीस पीर” के पास है, नमाज के लिए उपलब्ध कराई गई है जो सबसे उपयुक्त और निकटतम भूमि थी।

एडीएम संजीव केशव पांडे से जब सवाल किया गया कि क्या ये नमाज की जमीन ASI के 300 मीटर के संरक्षित दायरे में है? इस पर उन्होंने जवाब में कहा कि उनकी जानकारी में ये 300 मीटर के दायरे में नहीं है। वैसे भी 300 मीटर के अंदर कोई भूमि उपलब्ध नहीं थी।

मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन की दी गई चालीस पीर परिसर पर नमाज पढ़ने से इंकार कर दिया है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के अब्दुल समद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने मौला कमाल मस्जिद परिसर के बगल में या सटी हुई जगह पर नमाज की व्यवस्था करने का आदेश दिया था, वो भी 1 से 3 बजे के बीच। लेकिन कलेक्टर ने 3 घंटे तक इंतजार करवाया और आखिर में एक कागज देकर कहा कि नमाज के लिए लगभग 2 किलोमीटर दूर चालीस पीर दरगाह के पास जगह दी जा रही है। जबकि कोर्ट ने साफ “मस्जिद से सटी हुई जगह” कहा था, न कि 2 किमी दूर। ये आदेश का गलत इंटरप्रिटेशन है। 700 साल से चली आ रही परंपरा को तोड़ा जा रहा है और मुस्लिम समाज के अधिकारों का हनन हो रहा है।

इसको लेकर मुस्लिम पक्ष ने लिखित में आपत्ति दर्ज कराई है। सभी पिटीशनर्स और intervener के साथ मिलकर वकीलों से चर्चा के बाद इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में फिर से चैलेंज करेंगे। अब्दुल समद से जब पूछा गया कि क्या अगला आदेश आने तक चालीस पीर पर नमाज पढ़ेंगे, तो उन्होंने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि “हमारा main target मस्जिद कमाल मौला है, न कि चालीस पीर दरगाह। कोर्ट ने परिसर के आंगन में separate entry-exit के साथ जगह देने को कहा था।”

 यही वजह है कि धार भोजशाला में नमाज की जगह को लेकर मुस्लिम समाज और प्रशासन के बीच बैठक के बाद भी विवाद के चलते पुलिस फोर्स तैनात की गई है। कानूनी व्यवस्था को लेकर ASP विजय डाबर ने बताया कि 300 का बल लगाया गया है। कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस बल मौजूद रहेगा। 

भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में 5 अगस्त को अंतिम सुनवाई

भोजशाला मामले में 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कई अहम निर्देश दिए –

(1) मुस्लिम पक्ष को जुमे की नमाज़ हेतु दोपहर 1 से 3 बजे के मध्य समीप ही वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश सरकार को निर्देश दिये ।
(2) भोजशाला माँ सरस्वती मंदिर में मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति देने से इंकार ।
(3) भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष की पूजा पर कोई रोक नहीं लगाई गई।प्रतिदिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक माँ वाग्देवी की निरंतर पूजा जारी रहेगी।  
(4) हिंदू पक्ष के हित में हाई कोर्ट के द्वारा दिए गए फैसले  पर प्रतिबंध लगाने से इनकार  किया गया ।
(5) न्यायालय की अनुमति के बगैर ASI ( भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग) माँ सरस्वती मंदिर भोजशाला के मूल ढांचे में कोई परिवर्तन नहीं करेगा।
(6) सभी पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश ।
(7) अंतिम बहस हेतु 5 अगस्त 2026 नियत।

हिंदू पक्ष की ओर से सनातनी योद्धा अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन एवं वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विनय जोशी, रंजीत कुमार और सी एस  वैद्यनाथन, पार्थ यादव, सौरव सिंह, मणि मुंजाल ने पैरवी की। प्रकरण में हिंदू फ्रंट फार जस्टिस एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रंजना अग्निहोत्री, आशीष गोयल, आशीष जनक, मोहित गर्ग, सुनील सारस्वत को प्रतिवादी बनाया गया है। उक्त जानकारी हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष और भोजशाला याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने दी है।

भोजशाला में हुआ संध्या को हनुमान चालीसा का पाठ

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