कुंदन कुमार, पटना। बिहार की सियासत में शिक्षा व्यवस्था और वित्त रहित कॉलेजों का मुद्दा एक बार फिर से गर्माता हुआ नजर आ रहा है। राज्य सरकार की शिक्षा नीतियों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने एक तीखा बयान जारी करते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और इसे तानाशाही रवैया करार दिया है।राजेश राठौड़ ने अपने बयान में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार के कुल 534 प्रखंडों में से सरकार ने अब तक मात्र 211 प्रखंडों में ही डिग्री कॉलेज खोले हैं। सरकार के इस कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि वह अनुदानित और वित्त रहित कॉलेजों को महज अपना अघोषित उपक्रम मानती है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि यदि सरकार इन संस्थानों को अप्रत्यक्ष रूप से अपना उपक्रम मानती ही है, तो फिर इन कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?कांग्रेस प्रवक्ता ने पुरजोर मांग करते हुए कहा कि जब ये संस्थान सरकार के नियंत्रण और कार्यप्रणाली का हिस्सा बन चुके हैं, तो फिर इनमें कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को अंगीभूत (कॉन्स्टिट्यूएंट) कॉलेजों के शिक्षकों की तरह पूरा वेतन, पेंशन और अन्य सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही हैं? उन्होंने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का यह रवैया पूरी तरह से गलत, अन्यायपूर्ण और शिक्षकों के अधिकारों का हनन करने वाला है।राजेश राठौड़ ने चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य सरकार वित्त रहित और अनुदानित कॉलेजों के शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना बंद करे। इस तरह के संवेदनशील मामलों पर सरकार को अपनी आंखें मूंदने के बजाय गंभीरता से विचार करना ही होगा। यदि समय रहते इन शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर सदन तक जोरदार आंदोलन करेगी।

