मुजफ्फरपुर। जिले से एक बेहद प्रेरणादायक और समाज की दबी हुई सोच को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। मीनापुर प्रखंड के सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र अंतर्गत घोसौत गांव में एक पिता के निधन के बाद उनकी तीनों बेटियों ने बेटे का फर्ज निभाकर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है। परिवार में कोई बेटा न होने के कारण बेटियों ने न केवल अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया, बल्कि पाटीदारों के भारी विरोध और हंगामे के बावजूद सबसे छोटी बेटी ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं।

​जानिए क्या है पूरा मामला

​घोसौत गांव के वार्ड संख्या-9 में रहने वाले 65 वर्षीय दुर्गा सहनी का मंगलवार को निधन हो गया। दुर्गा सहनी के परिवार में उनकी तीन बेटियां देवी, शारदा देवी और पिंकी देवी हैं, लेकिन उनका कोई पुत्र नहीं था। पिता की अर्थी उठने से पहले ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन तीनों बहनों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने खुद ही अपने पिता के अंतिम संस्कार की पूरी कमान अपने हाथों में लेने का साहसिक फैसला किया।

​पाटीदारों ने किया विरोध और की धक्का-मुक्की

​मृतक दुर्गा सहनी का अपने कुछ पाटीदारों के साथ पुराना विवाद चल रहा था। जब बेटियां अपने पिता के अंतिम संस्कार की तैयारियां कर रही थीं, तब इन पाटीदारों ने अमानवीयता दिखाते हुए इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया। विरोध के दौरान बेटियों पर दबाव बनाने की कोशिश की गई और उनके साथ धक्का-मुक्की भी की गई, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
​घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय मुखिया अखिलेश राम तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने बेटियों को उनके कानूनी व सामाजिक अधिकारों के बारे में समझाया। जब विरोधी पक्ष अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तब पुलिस कार्रवाई की चेतावनी दी गई, जिसके बाद जाकर मामला शांत हुआ और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।

​अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट पहुंचीं बेटियां

​सभी पारिवारिक और सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए तीनों बेटियों और उनके एक नाती ने मिलकर पिता की अर्थी को कंधा दिया। वे उन्हें श्मशान घाट तक ले गईं, जहां सबसे छोटी बेटी पिंकी देवी ने अपने हाथों से पिता को मुखाग्नि दी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान विवाद करने वाला कोई भी पाटीदार न तो अर्थी को कंधा देने आया और न ही श्मशान घाट पहुंचा। हालांकि, बाद में गांव के अन्य लोगों ने आगे आकर बेटियों का पूरा साथ दिया।
​पूरे इलाके में हो रही है इस साहसिक कदम की चर्चा
​बेटियों के इस जज्बे और साहस की चर्चा अब पूरे मुजफ्फरपुर जिले में हो रही है। सामाजिक विरोध और पुरानी रूढ़िवादिता को चुनौती देते हुए जिस प्रकार इन तीनों बहनों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया, वह आज के बदलते समाज में महिला सशक्तिकरण और बेटियों की हिम्मत का एक बेहतरीन और जीवंत उदाहरण बन गया है।