मुजफ्फरपुर। जिले में जालसाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला अधिकारी को भाजपा सांसद के नाम पर धमकी दी गई। यह मामला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और एक दागी कर्मचारी को बचाने की कोशिश की गई है।

​सांसद का फर्जी परिचय देकर बनाया दबाव

​मुजफ्फरपुर (पश्चिमी) की डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ता) स्नेहा कुमारी को बीते 11 अप्रैल की दोपहर लगभग 3:31 बजे दो अलग-अलग नंबरों से कॉल आए। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को नवादा के सांसद विवेक ठाकुर बताया। अपनी पहचान पुख्ता करने के लिए उसने अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. ठाकुर के नाम का भी उल्लेख किया।
​उस व्यक्ति ने अधिकारी पर दबाव बनाया कि मड़वन अंचल के राजस्व कर्मचारी सन्नी कुमार के विरुद्ध चल रही विभागीय कार्रवाई को तुरंत रोक दिया जाए। बता दें कि यह कार्रवाई जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के निर्देश पर शुरू की गई थी।

​बात न मानने पर निगरानी विभाग की धमकी

​जब डीसीएलआर स्नेहा कुमारी ने नियम विरुद्ध जाकर कार्रवाई रोकने से साफ इनकार कर दिया, तो जालसाज अपनी असली औकात पर आ गया। उसने अधिकारी को सीधे शब्दों में धमकी दी कि यदि उसकी बात नहीं मानी गई, तो वह निगरानी विभाग में उनकी झूठी शिकायत दर्ज कराएगा और उन्हें बड़ी मुश्किल में डाल देगा।

​सांसद से संपर्क के बाद खुला राज

​इस धमकी के बाद अधिकारी ने सतर्कता बरतते हुए मामले की जानकारी जिलाधिकारी को दी। 17 अप्रैल को स्नेहा कुमारी ने स्वयं सांसद विवेक ठाकुर से संपर्क किया। सांसद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई कॉल नहीं किया है और न ही वे उक्त राजस्व कर्मचारी को जानते हैं। यह पुष्टि होते ही कि कॉल पूरी तरह फर्जी (फ्रॉड) था, प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई।

​पुलिस और साइबर सेल की जांच तेज

​जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर थाने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर और कॉल लोकेशन के आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है। साइबर सेल की मदद से सिम कार्ड के विवरण खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह के पीछे कौन है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या था।