95% भवन निर्माण पूरा, 84 पदों का प्रावधान; 11 मंजिला रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स और हॉस्टल को भी मंजूरी

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार कृषि को पारंपरिक खेती से आगे ले जाकर युवाओं को एग्री-बिजनेस, स्टार्टअप और कृषि उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। गुरुग्राम के गांव दौलताबाद में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार की ओर से स्थापित किए जा रहे बिजनेस मैनेजमेंट एंड एग्रीप्रेन्योरशिप इंस्टीट्यूट के लिए स्थायी वित्त समिति ‘सी’ ने आवश्यक बजटीय प्रावधानों को मंजूरी दे दी है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह संस्थान प्रदेश में कृषि, उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां युवाओं को बिजनेस मैनेजमेंट, कृषि उद्यमिता, स्टार्टअप, डिजिटल मार्केटिंग, एग्री-बिजनेस, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और वित्तीय प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक शिक्षा दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य युवाओं को सिर्फ नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाला उद्यमी बनाना है। गुरुग्राम देश के प्रमुख कॉर्पोरेट और स्टार्टअप हब में शामिल है। ऐसे में यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को उद्योगों से सीधा जुड़ाव, इंटर्नशिप, कौशल विकास, रिसर्च और प्लेसमेंट के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

11 मंजिला रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स और हॉस्टल बनेगा

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हरियाणा निवास में हुई स्थायी वित्त समिति ‘सी’ की बैठक में विद्यार्थियों और शिक्षकों की आवासीय जरूरतों को देखते हुए 11 मंजिला रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स बनाने तथा विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल निर्माण को भी मंजूरी दी गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान कृषि उत्पादों के वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग, एक्सपोर्ट और एग्री-टेक आधारित कारोबार के लिए युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देगा। इससे कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल बनेगा तथा निवेश, रोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं को देखते हुए युवाओं को कृषि व्यवसाय से जोड़ना समय की जरूरत है। संस्थान किसानों की आय बढ़ाने, नए उद्यम खड़े करने और युवाओं के पलायन को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

95 फीसदी भवन निर्माण पूरा

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. कम्बोज ने बताया कि ग्राम दौलताबाद, गुरुग्राम में संस्थान की स्थापना को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी थी। राज्य सरकार ने भवन निर्माण के लिए बजट भी आवंटित किया था। वर्तमान में संस्थान के भवन का करीब 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

उन्होंने बताया कि संस्थान के सुचारू संचालन के लिए यूजीसी, एआईसीटीई और आईसीएआर के मानदंडों के अनुसार 41 शिक्षक और 43 गैर-शिक्षक, यानी कुल 84 पदों का प्रावधान किया गया है।

प्रो. कम्बोज ने कहा कि संस्थान में केस स्टडी, प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग, व्यावहारिक प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन पर जोर दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की दक्षता और नए विचारों को व्यवसाय में बदलने की क्षमता विकसित होगी।

कृषि को कारोबार से जोड़ने पर जोर

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि संस्थान के जरिए युवाओं को कृषि क्षेत्र में आधुनिक प्रबंधन, उद्यमिता और व्यवसायिक कौशल का प्रशिक्षण मिलेगा। कृषि को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित रखने के बजाय युवाओं को एग्री-बिजनेस, स्टार्टअप और वैल्यू एडिशन के नए अवसरों से जोड़ा जाएगा।

बैठक में सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजेंद्र कुमार, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण के चेयरपर्सन पवन यादव सहित विभिन्न अधिकारी मौजूद रहे।

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