कुमार उत्तम, मुजफ्फरपुर। जिले के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से सामने आए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। लापता लैपटॉप कारोबारी मनोज भगत और उनकी पत्नी मीनू देवी की हत्या किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि संपत्ति के लालच में उनके अपने ही सगे भाई अविनाश उर्फ अनुज ने की थी। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए आरोपी भाई को उत्तर प्रदेश के बनारस से गिरफ्तार कर लिया है।
संपत्ति विवाद बना खूनी संघर्ष
सिटी एसपी मोहिल्बुला अंसारी द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरी वारदात का खुलासा किया गया। पुलिस पूछताछ में आरोपी अविनाश ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि 19-20 मई की रात करीब 1 बजे उसने सबसे पहले अपनी भाभी मीनू देवी का गला दबाकर हत्या कर दी।
इस दौरान अचानक उसका भाई मनोज भगत वहां आ गया। भाई को अपनी पत्नी की हत्या करते देख आरोपी ने घबराहट में कमरे में रखी एक भारी मूर्ति से मनोज के सिर पर जोरदार वार कर दिया, जिससे उसकी भी मौके पर ही मौत हो गई।
शवों को ठिकाने लगाकर तीर्थयात्रा पर निकला कातिल
भाई और भाभी की निर्मम हत्या करने के बाद शातिर आरोपी ने दोनों शवों को छत से नीचे उतारा। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए शवों को एक इंडिका कार की डिग्गी में लादकर बोचहां क्षेत्र के कर्णपुर उत्तरी इलाके में ले गया और वहां ठिकाने लगा दिया।
हत्या की इस घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी खुद भी 4 जून को फरार हो गया था। पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपी की बहन सारिका देवी ने ब्रह्मपुरा थाने में उसके भी लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस से बचने के लिए शातिर आरोपी बद्रीनाथ, केदारनाथ और देश के कई अन्य तीर्थस्थलों का भ्रमण करता रहा।
पुलिस कार्रवाई और स्पीडी ट्रायल की तैयारी
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर जाल बिछाया और 23 अगस्त की रात बनारस से आरोपी को दबोच लिया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई इंडिका कार भी बरामद कर ली है।
घटनास्थल और आरोपी द्वारा बताए गए ठिकानों से मिले अवशेषों को डीएनए जांच और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। सिटी एसपी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस के पास आरोपी के खिलाफ पुख्ता तकनीकी और मौखिक साक्ष्य मौजूद हैं। इस गंभीर मामले को न्याय की श्रेणी में रखते हुए स्पीडी ट्रायल के तहत चलाया जाएगा, ताकि आरोपी को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाई जा सके।


