कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। शहर में प्रेम की एक ऐसी कहानी भी है, जिसमें इंसान नहीं, बल्कि एक नाग और नागिन के प्रेम ने लोगों के दिलों पर ऐसी छाप छोड़ी कि उनकी याद में मंदिर बना दिया गया। कहानी में हादसा है, विरह, रहस्य और आस्था भी। नाग पंचमी पर ग्वालियर का ट्रांसपोर्ट नगर…जहां एक मंदिर अपने आप में बेहद अनोखा है। नाम है अमर प्रेम मंदिर…, जहां नाग देवता और सती नागिन माता की पूजा होती है। मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की आस्था नाग-नागिन के उस प्रेम से जुड़ी है, जिसकी कहानी आज भी लोगों को भावुक कर देती है। नाग पंचमी पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यही वजह है कि प्रेमी जोड़े भी यहां मन्नत मांगने आते हैं।
नाग के वियोग में नागिन की मौत माना
इस मंदिर के पीछे की कहानी शुरू होती है एक ऐसे हादसे से… जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया था। तारीख थी 1 जनवरी 2015,ट्रांसपोर्ट नगर के गेट नंबर-1 के सामने एबी रोड…रात का वक्त…नाग-नागिन का एक जोड़ा सड़क पार कर रहा था। तभी तेज रफ्तार ट्रक आया और एक नाग को कुचल दिया।इसके बाद जो हुआ उसने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक,नाग की मौत के बाद नागिन करीब पांच घंटे तक वहीं रही। सड़क पर फन पटकती रही, मानो अपने साथी की मौत का विरोध कर रही हो,फिर अचानक नागिन वहां से गायब हो गई,लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई, अगले दिन जब लोग वहां पहुंचे तो नाग के पास नागिन भी मिली, लेकिन इस बार उसकी भी मौत हो चुकी थी, स्थानीय लोगों ने इसे नाग के वियोग में नागिन की मौत माना।
स्मृति में मंदिर बनवा दिया
इलाके में यह खबर फैलते ही लोग मौके पर जुटने लगे। दोनों का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया,और यहीं से जन्म हुआ,अमर प्रेम मंदिर का। नागिन के प्रेम और समर्पण की इस कहानी ने लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ी। कुछ ही समय बाद स्थानीय लोगों ने नागिन को सती माता का स्वरूप मानकर उनकी स्मृति में मंदिर बनवा दिया,आज यही मंदिर अमर प्रेम मंदिर के नाम से जाना जाता है,यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ मंदिर नहीं बल्कि प्रेम, समर्पण और आस्था का प्रतीक है।
अलग-अलग बातें कही जाती
कहानी सच में कितनी रहस्यमयी थी, नागिन की मौत के पीछे असल वजह क्या थी, इसे लेकर अलग-अलग बातें कही जाती हैं। लेकिन स्थानीय लोगों की आस्था ने इस घटना को एक ऐसी कहानी में बदल दिया, जिसे आज भी लोग श्रद्धा से याद करते हैं।नाग पंचमी पर यहां उमड़ने वाली भीड़ इसी आस्था की गवाही देती है। बहरहाल एक हादसा, एक नाग का बिछड़ना नागिन का रहस्यमयी अंत और फिर आस्था से जन्मा एक मंदिर,ग्वालियर का अमर प्रेम मंदिर आज भी उस अनोखी कहानी को अपने भीतर समेटे हुए है जहां प्रेम की कोई भाषा नहीं,कोई सीमा नहीं और शायद यही वजह है कि नाग-नागिन की यह कहानी लोगों के लिए आज भी अमर प्रेम की मिसाल बनी हुई है।
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