वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले में सरकारी बस सेवा पर मंगलवार को भारी संकट आ गया है। निजी बस संचालकों की कथित दबंगई, मारपीट और विभागीय उदासीनता से परेशान होकर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के चालक और संवाहक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इसके कारण बिहारशरीफ सरकारी बस स्टैंड से पटना रूट पर चलने वाली करीब 39 से 40 बसों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

​निजी संचालकों की दबंगई और सुरक्षा का गंभीर संकट

​हड़ताली चालकों (राम कुमार और गुड्डू कुमार) का आरोप है कि पिछले 15-20 दिनों से पटना के कुम्हरार, राजेंद्र नगर और भूतनाथ रोड क्षेत्रों में सरकारी बसों के परिचालन में लगातार बाधा डाली जा रही है। निजी संचालकों द्वारा बसों को तय रूट पर जाने से रोकने के साथ ही कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की जा रही है। कर्मचारियों ने दो टूक कहा है कि जब तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती और विभाग सख्त कार्रवाई नहीं करता, तब वे बसों का संचालन नहीं करेंगे।

​लंबी ड्यूटी और अनियमित वेतन से कर्मचारी परेशान

​संवाहक राजेश कुमार ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बताया कि कर्मचारियों से तय 8 घंटे की जगह 12 से 16 घंटे तक काम लिया जाता है। इसके बावजूद महीने की शुरुआत में मिलने वाला वेतन कई-कई दिनों की देरी से मिलता है। वहीं, कर्मचारी लक्ष्मण कुमार ने बताया कि निजी बसों का किराया 100 से 120 रुपये है, जबकि सरकारी बसों का किराया 148 से 172 रुपये तक है। अधिक किराया होने के बावजूद कर्मचारियों पर टिकट बिक्री का अनावश्यक दबाव बनाया जाता है।

​यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

​अचानक हुई इस हड़ताल के कारण बस स्टैंड पहुंचे यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। फ्लाइट पकड़ने पटना एयरपोर्ट जा रहे सुरेश कुमार और अन्य यात्री रणधीर दयाल ने हड़ताल पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है।
​बिहारशरीफ बस स्टैंड के स्टेटिस्टिकल क्लर्क अरुण कुमार ने हड़ताल की पुष्टि करते हुए बताया कि मारपीट और सुरक्षा मामलों की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी गई है। हालांकि, फिलहाल यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाई है, जिससे सभी की निगाहें अब विभाग और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।