दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। जिला चिकित्सालय में जन्म प्रमाण पत्रों में बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े और रिकॉर्ड में हेरफेर का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के आधिकारिक CRS पोर्टल और फर्जी सील-हस्ताक्षरों का सहारा लेकर इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया है। मामला उजागर होने के बाद अस्पताल के चिकित्सक एवं जन्म-मृत्यु रजिसट्रार डॉ. अखिलेश सिंघल ने जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय को लिखित शिकायत सौंपकर उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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रजिस्ट्रार की पोर्टल आईडी का दुरुपयोग, बदल दिए माता-पिता के नाम
डॉ. अखिलेश सिंघल के मुताबिक हाल ही में उनके संज्ञान में दो ऐसे संदेहास्पद मामले आए हैं, जिनमें पूरी तरह फर्जी तरीके से प्रमाण-पत्र तैयार किए गए:
पहला मामला: जिला चिकित्सालय के रजिस्ट्रार की CRS पोर्टल आईडी का गलत इस्तेमाल कर एक बच्चे के माता-पिता का नाम और पता ही बदल दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल के मूल जन्म-मृत्यु या डिलीवरी रजिस्टर में ऐसा कोई संशोधन दर्ज ही नहीं है और न ही इसके लिए कोई आवेदन मिला था, फिर भी पोर्टल पर डिजिटल हस्ताक्षर के साथ संशोधित प्रमाण-पत्र जारी हो गया।
दूसरा मामला: जुड़वा बच्चों के प्रमाण-पत्रों में भी ऐसी ही गंभीर गड़बड़ी और हेरफेर पाई गई है।
फर्जी सील और नकली दस्तखत
लिखित शिकायत में यह भी बड़ा खुलासा हुआ है कि जारी किए गए फर्जी प्रमाण-पत्र पर लगी डिस्पैच सील अस्पताल की मूल विभागीय सील से पूरी तरह अलग है। यही नहीं कार्यालय प्रभारी के हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए हैं। इस स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि अस्पताल के बाहर कोई संगठित गिरोह या रैकेट सक्रिय है, जो फर्जी सील और जाली हस्ताक्षरों का उपयोग कर इस अवैध खेल को अंजाम दे रहा है।
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सिविल सर्जन ने पुलिस को सौंपी कमान
मामले की गंभीरता और सरकारी रिकॉर्ड में सेंधमारी को देखते हुए जिला चिकित्सालय की सिविल सर्जन डॉ. सुनीता कामले ने बताया कि यह पूरा प्रकरण उनके संज्ञान में आते ही अस्पताल प्रबंधन ने मुस्तैदी दिखाई है। प्रबंधन की ओर से पुलिस को लिखित सूचना देकर मामले की एफआईआर और जांच के लिए कहा गया है, साथ ही जिला योजना अधिकारी को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है। फिलहाल पुलिस और संबंधित तकनीकी विभाग इस रैकेट की तह तक जाने और दोषियों को बेनकाब करने के लिए विस्तृत जांच में जुट गए हैं।
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