दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। हिल स्टेशन पचमढ़ी के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के घने जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। एसटीआर ने जंगल की दुगुनी सुरक्षा के लिए नए नवाचार किया है। क्षेत्रीय संचालक के कुशल निर्देशन में गठित ‘टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स’ (TPF) ने पिछले दो महीनों के भीतर ही शिकारियों के नेटवर्क को ध्वस्त कर वन्यजीव संरक्षण की एक नई इबारत लिख दी है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व पचमढ़ी छेत्र के उपसंचालक संजीव शर्मा के अनुसार इस पहल की सबसे बड़ी ताकत स्थानीय भागीदारी है। प्रत्येक सब-डिवीजन से 6 ऐसे स्थानीय युवाओं का चयन किया गया है, जो जंगल की रग-रग से वाकिफ हैं। अपनी माटी के प्रति जुड़ाव और भौगोलिक समझ के कारण ये युवा सुरक्षा घेरे को अभेद्य बना रहे हैं। यह फोर्स केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। टीम की कार्यशैली की मुख्य विशेषताएं यह है कि यह जांबाज जवान प्रतिदिन 20 से 25 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता पैदल तय करते हैं।
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सतत निगरानी से एक माह के भीतर पचमढ़ी सब-डिवीजन का चप्पा-चप्पा छाना जा रहा है। अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगाकर टीम चौबीसों घंटे सक्रिय रहती है। साथ ही टीम की सक्रियता केवल कोर एरिया तक सीमित नहीं है, स्थानीय बाजारों और संवेदनशील गांवों में भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जिससे अवैध गतिविधियों पर लगाम लगी है। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए जवानों को वायरलेस सेट और आधुनिक मोबाइल फोन से लैस किया गया है।
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इससे न केवल उनकी रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक की जा सकती है, बल्कि आपात स्थिति में सूचनाओं का आदान-प्रदान भी त्वरित गति से हो रहा है। इस विशेष मुस्तैदी का सुखद परिणाम यह है कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में एक भी नया वन्यजीव अपराध दर्ज नहीं हुआ है। शिकारियों के बीच स्पष्ट संदेश गया है कि सतपुड़ा का कोना-कोना अब सुरक्षाबलों की नजर में है। संजीव शर्मा के कहा कि हमारा लक्ष्य सतपुड़ा के जंगलों को पूरी तरह सुरक्षित और भयमुक्त बनाना है। यह तो बस शुरुआत है, आने वाले समय में हम इस फोर्स को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाएंगे।

