दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। भारतीय संस्कृति और क्लासिकल संगीत का जादू अब सिर्फ देश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी युवा इसके दीवाने हो रहे हैं। इसका एक खूबसूरत नजारा मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में देखने को मिला, जहां उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद से आईं नृत्यांगना सुश्री शबनम ने अपनी कला से सबका दिल जीत लिया। नर्मदापुरम के नर्मदा रिवर व्यू होटल में भारतीय संस्कृति और संगीत के प्रचार-प्रसार के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

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कत्थक और हिप-हॉप जैसे नृत्यों में माहिर ताशकंद की शबनम इन दिनों भारत भ्रमण पर हैं। वे दुनिया भर में भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य का प्रचार कर रही हैं। नर्मदापुरम पहुंची शबनम ने मीडिया से चर्चा में कहा कि भारत की विविधता, यहाँ के अलग-अलग राज्यों की पोशाकें, इतिहास और खान-पान बेहद खूबसूरत हैं, जो विदेशी युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। 

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इस दौरान दिल्ली सरस्वती म्यूजिक कॉलेज के डायरेक्टर बी.आर. सैनी ने बताया कि साल 2006 में अभिनेता ऋषि कपूर और रणधीर कपूर के सौजन्य से ताशकंद में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र और म्यूजिक कॉलेज की स्थापना की गई थी, जो आज वहाँ का नंबर वन संस्थान है। यहाँ सैकड़ों उज़्बेकिस्तानी बच्चे भारतीय कत्थक, क्लासिकल और फिल्मी डांस सीख रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस महीने के अंत में एक बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिसमें मनोज तिवारी सहित कई हस्तियां और ताशकंद के बच्चे अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे।

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