अररिया। बिहार के नरपतगंज प्रखंड अंतर्गत फुलकाहा थाना क्षेत्र के पोसदाहा पंचायत के डुमरिया गांव में भूमि विवाद का एक बड़ा मामला सामने आया है। करीब 20 साल पुरानी जमीन खरीद के मामले में प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारियों की कथित संलिप्तता ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। पीड़ित बैजनाथ बहरदार की शिकायत पर फुलकाहा थाने में तीन अंचल अधिकारियों (CO), तीन राजस्व कर्मचारियों और अन्य स्थानीय लोगों सहित कुल 55 व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित बैजनाथ बहरदार का आरोप है कि उन्होंने लगभग दो दशक पहले सुरेंद्र शर्मा, वीरेंद्र साह, कलानंद बहरदार, नित्यानंद बहरदार, चंदेश्वरी बहरदार, राजेश बहरदार, नरेश शर्मा और बाबूनंद यादव सहित अन्य से विधिवत रजिस्ट्री के जरिए ढाई एकड़ से अधिक भूमि खरीदी थी। न्यायालय के आदेश के बाद उनके नाम पर जमाबंदी कायम की गई और वे वर्षों से उस भूमि पर खेती कर रहे थे।
राजस्व अभिलेखों में हेरफेर का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि न्यायालय के आदेश और पुराने राजस्व अभिलेखों को दरकिनार करते हुए कुछ लोगों ने राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ मिलकर ऑनलाइन जमाबंदी में साजिश के तहत छेड़छाड़ की। इसके माध्यम से नई जमाबंदी तैयार कर उनकी पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जा करने और मालिकाना हक बदलने का कुत्सित प्रयास किया गया। प्राथमिकी में तत्कालीन सीओ शंभु प्रकाश, उत्तम राहुल, वर्तमान सीओ रविंद्र कुमार तथा राजस्व कर्मचारी रेणु कुमारी और जितेंद्र कुमार राय को मुख्य रूप से नामजद किया गया है।
जांच और पुलिस का रुख
इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय प्रबुद्ध जनों का मानना है कि इस पेचीदा मामले की सच्चाई केवल राजस्व अभिलेखों की उच्चस्तरीय और पारदर्शी जांच से ही सामने आ सकती है। वहीं, फुलकाहा थानाध्यक्ष विकास कुमार मौर्य ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय के निर्देश और पीड़ित के आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस जांच के दौरान सभी संबंधित दस्तावेजों, पूर्व के अदालती आदेशों और राजस्व अभिलेखों का बारीकी से परीक्षण करेगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कानून सम्मत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

