अमित पाण्डेय, डोंगरगढ़। आमतौर पर आस्था के लिए पहचाने जाने वाले डोंगरगढ़ में इस बार विज्ञान और तर्क की बातें गूंजती नजर आईं। मां बमलेश्वरी मंदिर प्रांगण में पहली बार राष्ट्रीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं जन जागरूकता शैक्षिक संगोष्ठी-2026 का आयोजन हुआ। प्रकृति शिक्षक विज्ञान यात्रा की ओर से आयोजित इस राष्ट्रीय स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से शिक्षक, विद्यार्थी, शिक्षाविद और विज्ञानप्रेमी शामिल हुए।
संगोष्ठी का मकसद सिर्फ विज्ञान के प्रयोग दिखाना नहीं, बल्कि समाज में ‘क्यों?’ और ‘कैसे?’ पूछने की आदत विकसित करना रहा। कार्यक्रम में वैज्ञानिक सोच, तर्कशीलता, प्रश्न करने की प्रवृत्ति और जनजागरूकता को बढ़ावा देने के साथ अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि किसी भी मान्यता या घटना को आंख मूंदकर स्वीकार करने के बजाय उसे तर्क, तथ्य, प्रमाण और वैज्ञानिक परीक्षण की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
अलग-अलग राज्यों से पहुंचे प्रतिभागी, दिखाए विज्ञान के मॉडल
राष्ट्रीय संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रतिभागियों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शिक्षा में विज्ञान की भूमिका और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। वहीं अलग-अलग विद्यालयों और जिलों से आए विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक मॉडल, प्रयोग और नवाचारी गतिविधियों का प्रदर्शन किया। कई प्रयोगों के जरिए दैनिक जीवन से जुड़ी धारणाओं और सामाजिक कुरीतियों के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को सरल तरीके से समझाया गया, कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां खास आकर्षण का केंद्र रहीं। बच्चों ने अपने बनाए वैज्ञानिक मॉडल और प्रयोगों के जरिए यह बताने की कोशिश की कि विज्ञान सिर्फ किताबों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी मौजूद है।

शिक्षकों ने भी टीचिंग लर्निंग मटेरियल (TLM) और अलग-अलग शैक्षिक मॉडलों के जरिए विज्ञान को आसान और व्यवहारिक तरीके से समझाया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मनोज मिश्रा, राष्ट्रीय संयोजक, बिहार रहे, जबकि अध्यक्षता भुवनेश्वर मरकाम, सचिव, टीम नेक्स्ट ने की। विशेष अतिथियों में विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीनिवास मिश्रा, डॉ. आशीष नायक, डॉ. स्वाति गंधर्व, कुमार मंडावी, अभिषेक शुक्ला, लखन साहू, अश्विनी पंचबिए और भारती तिवारी सहित शिक्षक, शिक्षाविद और विज्ञानप्रेमी मौजूद रहे।
मंदिर प्रांगण से दिया वैज्ञानिक सोच का संदेश
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का मतलब किसी धर्म या आस्था का विरोध करना नहीं है। इसका उद्देश्य हर विषय को तर्क, तथ्य और प्रमाण के आधार पर समझने की प्रवृत्ति विकसित करना है। कार्यक्रम में आस्था के सम्मान के साथ अंधविश्वास और अवैज्ञानिक धारणाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया, डोंगरगढ़ में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी ने एक अलग संदेश दिया, सवाल करना गलत नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच की पहली सीढ़ी है। आयोजकों ने भविष्य में भी विभिन्न स्थानों पर विज्ञान जागरूकता और शैक्षिक गतिविधियों के आयोजन की बात कही है।
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