बिहार की समृद्ध कृषि विरासत और पारंपरिक खाद्य संस्कृति अब आधुनिक शहरी बाजारों में अपनी एक अलग जगह बना रही है। शहरी उपभोक्ता आज केवल स्वाद और कीमत नहीं, बल्कि भोजन के स्रोत और उसकी गुणवत्ता को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी बदलाव के बीच बिहार से शुरू हुआ स्टार्टअप Natureship ग्रामीण किसानों और उपभोक्ताओं के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहा है।
जड़ों की ओर वापसी और कॉर्पोरेट सफर
Natureship की नींव प्रेरणा मिश्रा ने रखी है। कॉर्पोरेट सेक्टर में करीब सात साल बिताने के बाद उन्होंने अपनी जड़ों की ओर लौटने का निर्णय लिया। उनका उद्देश्य पारंपरिक खाद्य पद्धतियों को सहेजना और ऐसे उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुंचाना था, जो ग्रामीण समुदायों और स्थानीय किसानों की मेहनत से जुड़े हुए हैं। यह कंपनी मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के ग्रामीण इलाकों से खाद्य सामग्री एकत्र कर आधुनिक उपभोक्ताओं तक पहुंचाती है।



भौगोलिक पहचान और पारंपरिक उत्पाद
इस स्टार्टअप के प्रमुख उत्पादों में जगदीशपुर के गंगा के बाढ़ वाले मैदानी इलाके का कतरनी चावल और चूड़ा शामिल हैं। जलोढ़ मिट्टी से समृद्ध इस क्षेत्र में साल में एक बार कतरनी चावल की फसल होती है, जो अपनी खास खुशबू और स्वाद के लिए जानी जाती है। इसके अलावा, बिहार की सामग्री से तैयार हाथ का बना पारंपरिक सत्तू भी इसकी मुख्य पहचान है।
आधुनिक जीवनशैली के लिए नया प्रारूप
पारंपरिक सत्तू को आज के व्यस्त शहरी जीवन के अनुकूल बनाने के लिए Natureship ने 55 ग्राम का इंस्टेंट सत्तू प्रोटीन मिक्स पेश किया है। इसे मात्र बीस सेकंड में आसानी से तैयार किया जा सकता है। यह पहल पारंपरिक व्यंजनों को सुविधाजनक और आधुनिक पैकेजिंग के साथ नए उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रभावी कदम है।
ग्रामीण महिलाओं और किसानों का सशक्तिकरण
यह उद्यम छोटे किसानों और ग्रामीण महिला उत्पादक समुदायों के साथ मिलकर काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाना तथा ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करना है। पारदर्शी सप्लाई चेन के जरिए यह मॉडल उत्पादों के पीछे की पूरी कहानी को उपभोक्ताओं के सामने लाता है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहना
Natureship की इस अनूठी पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सराहा जा चुका है। इसके अलावा, इसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) से भी मान्यता मिली है। स्टार्टअप को IIM बैंगलोर के NSRCEL से इनक्यूबेशन और IIT बॉम्बे के Eureka! कार्यक्रम में फाइनलिस्ट का स्थान मिला है। संस्थापक प्रेरणा मिश्रा ने IIM अहमदाबाद से क्रिएटिव एंड कल्चरल बिजनेस प्रोग्राम पूरा किया है और उन्हें गोल्डमैन सैक्स 10,000 विमेन कार्यक्रम का प्रमाण पत्र भी प्राप्त है।
पारंपरिक खाद्य उत्पादों की असली पहचान सिर्फ उनके पैकेट तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे एक पूरा भूगोल, खेत और पीढ़ियों की विरासत जुड़ी होती है। Natureship इसी अनमोल कहानी को आधुनिक बाजार के सामने स्रजनशीलता के साथ प्रस्तुत कर रहा है।



