मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर जारी विवाद के बीच इनेलो (INLD) ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने परीक्षा रद्द होने से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण छात्रों द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदमों को सिस्टम की बड़ी नाकामी बताया है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर उठे विवाद के बीच अब सियासत भी तेज हो गई है। लेकिन इस बार बहस केवल परीक्षा, पेपर और व्यवस्था तक सीमित नहीं है। मामला उन छात्रों के टूटते हौसलों तक पहुंच गया है, जो डॉक्टर बनने का सपना आंखों में लिए महीनों नहीं, बल्कि सालों तक तैयारी करते हैं। परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद कई परिवारों में पसरा सन्नाटा अब राजनीतिक गलियारों तक गूंजने लगा है।
इसी मुद्दे को लेकर INLD ने BJP सरकार पर बड़ा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संरक्षक संपत सिंह ने आरोप लगाया कि NEET परीक्षा रद्द होने और व्यवस्था की विफलता ने छात्रों को मानसिक तनाव में धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि जो बच्चे पहले ही परीक्षा और भविष्य को लेकर चौबीसों घंटे दबाव में रहते हैं, उनके लिए ऐसी परिस्थितियां बेहद घातक साबित हुई हैं।
प्रो. संपत सिंह ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के 21 वर्षीय ऋतिक मिश्रा, जो तीसरी बार NEET परीक्षा दे रहे थे, परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद टूट गए और कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इसी तरह गोवा के कर्टोरिम इलाके में एक 17 वर्षीय छात्र, दिल्ली की अंशिका पांडेय और अन्य मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि “सिस्टम की विफलता” की दर्दनाक तस्वीर हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजस्थान के सीकर और बेंगलुरु से भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं।
INLD नेता ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि अब तक न कोई माफीनामा आया और न ही छात्रों व अभिभावकों को भरोसा देने वाला कोई ठोस कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र आज भी तनाव और असमंजस में हैं, लेकिन सरकार जवाबदेही तय करने से बच रही है। संपत सिंह ने मांग की कि पूरे मामले की जिम्मेदारी तय की जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे छात्रों का भविष्य अनिश्चितता और मानसिक दबाव की भेंट न चढ़े।

