केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले में शुक्रवार को महाराष्ट्र के लातूर शहर के स्थानीय कॉलेज में रसायन विज्ञान पढ़ाने वाले रिटायर प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया. अधिकारियों ने बताया कि कुलकर्णी चार साल पहले एक प्रतिष्ठित कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए थे और नीट के लिए रसायन विज्ञान विषय के प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति में शामिल थे. CBI के सूत्रों के मुताबिक, NEET-UG 2026 परीक्षा में हुए पेपर लीक कोई ऑर्गनाइज्ड सिंडिकेट का हिस्सा नहीं थां बल्कि ये केमिस्ट्री लेक्चरर पीवी कुलकर्णी ने अपने कोचिंग सेंटर को सुपरहिट करने के लिए जानबूझकर किया.
सीबीआई ने 12 मई को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से मिली लिखित शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया था. यह शिकायत NEET-UG 2026 परीक्षा के कथित पेपर लीक से संबंधित थी.
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने केमिस्ट्री लेक्चरर पीवी कुलकर्णी को मास्टरमाइंड बताया है. कुलकर्णी ने अपने कोचिंग सेंटर को सफल बनाने के लिए छात्रों को क्वेश्चन पेपर बेचे. उसे कहां पता था कि उसकी ही कोचिंग के एक स्टूडेंट की शरारत भरी हरकत देश में कुलकर्णी की पोल खोल देगी.
NEET का पेपर लीक पर सीबीआई की तरफ से जांच की जा रही है. उसने अपने स्टूडेंट को अपनी सहयोगी मनीषा वाघमरे के जरिए पुणे में अपने घर पर स्पेशल कोचिंग क्लास चलाई. सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, पीवी कुलकर्णी ने इन क्लासेज में छात्रों को परीक्षा में आने वाले सवाल, उनके विकल्प और सवालों के सही जवाब विस्तार से बताए थे. इसके बदले में पीवी कुलकर्णी ने छात्रों से मोटी फीस ली थी. लेकिन, उन छात्रों में से एक शरारती बच्चे ने पीवी कुलकर्णी के पूरे प्लान पर पानी फेर दिया.
पैसों और अपने कोचिंग के लालच की वजह से पीवी कुलकर्णी के एक छात्र ने अपने पैसों के नुकसान की भरपाई करने के लिए उस लीक किए गए NEET के उस गेस पेपर को सोशल मीडिया के जरिए ऐसे लोगों को भेजा, जो कोचिंग क्लास चलाते थे. सीबीआई के मुताबिक, यहीं से पेपर सैकड़ों लोगों तक पहुंच गया था. कुछ लोगों ने उस पेपर को गंभीरता से लिया जबकि ज्यादातर छात्रों ने उसे इतना गंभीरता से नहीं लिया.
पिछले 24 घंटों में CBI ने देशभर में कई जगहों पर छापेमारी की. इस दौरान एजेंसी ने आरोपियों के मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं. जिसमें, फोरेंसिक और टेक्निकल जांच शामलि है. इसे जांच के लिए CFSL भेज दिया गया. अब इनका फोरेंसिक और तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है.
सीबीआई सूत्रों का कहना है, कि अब तक की जांच में केमिस्ट्री पेपर लीक के असली सोर्स और छात्रों को जोड़ने वाले बिचौलियों की पहचान हो चुकी है. एजेंसी के मुताबिक, कई छात्रों से इन ‘स्पेशल क्लासेस’ में शामिल होने के बदले लाखों रुपये वसूले गए थे. CBI अब तक इस मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है.
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