सुदीप उपाध्याय, बलरामपुर। जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बलंगी में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही उजागर हुई है। यहां मरीजों को जीवन देने वाली दवाइयां ही अब मौत का खतरा बनती नजर आ रही हैं। अस्पताल के स्टॉक रूम में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां पड़ी मिली हैं, जिन्हें महीनों बाद भी न तो डिस्पोज किया गया और न ही सुरक्षित तरीके से अलग रखा गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने की इतनी बड़ी लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? क्या स्वास्थ्य विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?

जानकारी के मुताबिक, जिला मुख्यालय से करीब 150 किलोमीटर दूर स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र में एक्सपायर हो चुकी दवाइयां खुलेआम स्टॉक में पड़ी हैं। अगर भूलवश भी इनमें से कोई दवा मरीजों तक पहुंच जाती, तो गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता था। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब मरीज जिन दवाइयों पर भरोसा कर अस्पताल पहुंचते हैं, वही दवाइयां उनके लिए जहर साबित हो सकती थीं।

मामले में अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर मुकेश यादव ने सफाई देते हुए कहा कि यहां पदस्थ फार्मासिस्ट को दूसरी जगह अटैच कर दिया गया है, जिसके कारण एक्सपायरी दवाइयों का डिस्पोजल नहीं हो पाया। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक कर्मचारी के हटते ही पूरा सिस्टम ठप पड़ जाता है? क्या अस्पताल में दवाइयों की निगरानी करने वाला कोई नहीं है?

स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि मरीजों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ मानी जा रही है। क्षेत्र के लोगों में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठने लगी है।

अब देखने वाली बात होगी कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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