नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भोटेकोशी की बाढ़ पर बात की। शाह ने भोटेकोशी की बाढ़ को सिर्फ नेपाल की आपदा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी बताया। इसके साथ ही शाह ने इस आपदा के बाद राहत कार्य में मदद के लिए भारत और चीन को धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि हिमालय में बढ़ते खतरे से निपटने के लिए नेपाल, भारत और चीन को साथ आना होगा।
शाह ने कहा कि इस बाढ़ ने सड़कें, पुल, स्कूल, घर और लोगों के काम-धंधे सबकुछ तबाह कर दिए। उन्होंने दुनिया से अपील करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आई आपदा से प्रभावित गरीब देशों को दोबारा खड़ा करने के लिए कर्ज नहीं, ग्रांट दिया जाना चाहिए यानी ऐसी मदद दी जाए जिसे वापस न करना पड़े।
हिमालय के लिए भारत-चीन के साथ अलर्ट सिस्टम बनाने का प्रस्ताव
बालेन शाह ने नेपाल, भारत और चीन के बीच एक साझा अलर्ट सिस्टम बनाने का प्रस्ताव दिया, ताकि बाढ़ और ग्लेशियर से आने वाली आपदाओं का पहले पता चल सके। इसके तहत तीनों देश;
सैटेलाइट से मिली जानकारी आपस में शेयर करेंगे।
खतरनाक ग्लेशियर झीलों पर नजर रखेंगे।
बाढ़ की पहले सूचना देने वाला सिस्टम मजबूत करेंगे।
आपदा आने पर राहत-बचाव में साथ काम करेंगे।
शाह ने कहा कि तीनों देशों के बीच जानकारी शेयर होने और मिलकर तैयारी करने से आपदा में होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है।
बालेन बोले- भोटेकोशी की बाढ़ सिर्फ नेपाल की समस्या नहीं
बालेन शाह ने कहा कि भोटेकोशी-त्रिशूली की बाढ़ सिर्फ नेपाल की समस्या नहीं है। जलवायु बदलाव का असर पूरे हिमालयी इलाके पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसका असर भारत, भूटान, बांग्लादेश, पाकिस्तान और दूसरे पड़ोसी देशों पर भी पड़ सकता है। इसलिए हिमालय से जुड़ी आपदाओं से निपटने के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा।
ग्लेशियर टूटने के बाद आई थी बाढ़
26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास तिब्बत इलाके में ग्लेशियर टूटने के बाद भूस्खलन हुआ, जिससे अचानक बाढ़ आ गई। पानी और मलबे ने नीचे की घाटियों में भारी तबाही मचाई। सरकारी आंकड़ों की माने तो इस आपदा में कम से कम 1450 लोगों की मौत हुई है। कई हफ्ते बाद भी राहत और लापता लोगों की तलाश जारी है। 6000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। शाह ने कहा कि इनमें से कई लोग शायद कभी नहीं मिल पाएंगे।
नेपाल को GDP के 10% के बराबर मदद की जरूरत
शाह के मुताबिक, इस आपदा के बाद नेपाल को सड़क, पुल, घर और दूसरी जरूरी चीजें दोबारा बनाने के लिए अपनी GDP के करीब 10% के बराबर मदद की जरूरत है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने यह भी कहा कि, दुनिया ने युद्ध के लिए सामान पहुंचाने की व्यवस्था तो बहुत मजबूत बना ली है, लेकिन जरूरतमंद लोगों तक खाना और राहत पहुंचाने की व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं है।
नेपाल ने UN फंड से 20 मिलियन डॉलर की मदद मांगी
नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के लॉस एंड डैमेज फंड से 20 मिलियन डॉलर की मदद मांगी है। इस फंड से एक देश अधिकतम इतनी ही राशि मांग सकता है। हालांकि, यह रकम नेपाल को हुए नुकसान के मुकाबले काफी कम है। नेपाल सरकार के शुरुआती आकलन के मुताबिक, बाढ़ से देश को करीब 5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।
लॉस एंड डैमेज फंड 2022 में पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बनाया गया था, ताकि जलवायु आपदाओं से प्रभावित देशों की मदद की जा सके। अब तक इस फंड से किसी देश को राशि जारी नहीं की गई है।
बांग्लादेशी PM बोले- देश 2024 में फासीवाद से आजाद हुआ
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने गुरुवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। इस दौरान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने कहा कि, साल 2024 में बांग्लादेश ‘फासीवाद’ से आजाद हुआ। उन्होंने कहा कि अब उनकी सरकार देश को दोबारा मजबूत करने के लिए काम कर रही है।
तारिक रहमान का इशारा शेख हसीना की सरकार से था। छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। रहमान ने रोहिंग्या संकट पर भी बात की और कहा कि रोहिंग्या संकट की शुरुआत म्यांमार से हुई है, इसलिए इसका समाधान भी वहीं होना चाहिए। विस्थापित रोहिंग्याओं की सुरक्षित वापसी ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है।
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