शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश (छुट्टी) स्वीकृत करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए नए नियमों का निर्धारण किया है। ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम’ के अंतर्गत वित्त विभाग द्वारा इस संबंध में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से लेकर प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों तक की छुट्टी मंजूर करने का क्राइटेरिया पूरी तरह तय कर दिया गया है।
कलेक्टर और कार्यालय प्रमुखों को मिले नए अधिकार
नए नियमों के अनुसार, शासन ने विकेंद्रीकरण की नीति अपनाते हुए स्थानीय स्तर पर छुट्टी मंजूर करने के अधिकार सौंपे हैं। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृत करने का पूरा अधिकार अब संबंधित कार्यालय प्रमुख के पास होगा। वे नियमों के दायरे में रहकर अपने स्तर पर ही छुट्टी मंजूर कर सकेंगे। अधिकतम अवधि नए क्राइटेरिया के तहत कर्मचारी एक बार में अधिकतम 120 दिनों तक का अवकाश ले सकेंगे। शासकीय सेवा के द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को अवकाश की अनुमति देने का अधिकार अब सीधे जिला कलेक्टर को सौंप दिया गया है।
प्रथम श्रेणी अधिकारियों और संचनालय स्तर के लिए यह क्राइटेरिया
वित्त विभाग के आदेश के मुताबिक, उच्च पदस्थ अधिकारियों की छुट्टियों के लिए प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट किया गया है। प्रथम श्रेणी अधिकारी: प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को अवकाश की स्वीकृति अब संबंधित विभागाध्यक्ष कार्यालय द्वारा दी जाएगी। संचनालय और कोष स्तर: संचनालय स्तर पर व्यवस्था को मजबूत करते हुए कार्यालय प्रमुख, संचालक और कोष आयुक्त को उनके अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृत करने के विशेष अधिकार दिए गए हैं। इस नए नियम और क्राइटेरिया के लागू होने से अब शासकीय विभागों में छुट्टियों को लेकर होने वाली फाइलों की देरी पर लगाम लगेगी और प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी।

