वीरेंद्र कुमार, ​नालंदा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली की एक विशेष सलाहकार टीम ने हाल ही में नालंदा खुला विश्वविद्यालय (NOU) का औचक निरीक्षण किया। इस उच्च स्तरीय टीम का नेतृत्व प्रोफेसर कन्हैया त्रिपाठी ने किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने विश्वविद्यालय परिसर में मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाओं, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और छात्र-छात्राओं के कल्याण से जुड़े तमाम पहलुओं का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों से लेकर छात्रों तक से सीधी बातचीत की गई, जिससे विश्वविद्यालय के कामकाज की जमीनी हकीकत सामने आई।

​मानवाधिकार पाठ्यक्रम शुरू करने की अहम सलाह

​निरीक्षण के मुख्य आकर्षणों में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। विशेष सलाहकार प्रोफेसर कन्हैया त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पुरजोर आग्रह किया कि वे अपने पाठ्यक्रम में मानवाधिकार से जुड़े विषयों को शामिल करें। उनका मानना था कि समाज के हर व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकारों की पूरी जानकारी होनी चाहिए, और इस दिशा में एक खुला विश्वविद्यालय बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। प्रशासन ने इस सकारात्मक सुझाव पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

​महिला और ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए विशेष छूट

​विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और समावेशी संस्कृति की जानकारी देते हुए आईटी कोऑर्डिनेटर डॉ. अमरनाथ पांडेय ने टीम को कई खास बातें बताईं। उन्होंने बताया कि नालंदा खुला विश्वविद्यालय महिलाओं और ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रहा है। इसके तहत महिला एवं ट्रांसजेंडर छात्राओं को ट्यूशन फीस में 25 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाती है, जो एक सराहनीय कदम है। इसके अलावा, डॉ. पल्लवी ने स्पष्ट किया कि खुला विश्वविद्यालय होने के कारण यहां शिक्षा प्राप्त करने के लिए आयु की कोई सीमा नहीं है, जिससे हर वर्ग के लोग अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।

​जीरो टॉलरेंस नीति और सेवाओं का दावा

​कुलसचिव प्रोफेसर अभय कुमार सिंह ने टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया और विश्वविद्यालय की प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रशासन छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखता है। विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाती है।
​छात्रों को राहत देते हुए उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि का जिक्र किया कि यदि कोई विद्यार्थी अपने सर्टिफिकेट या अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए आवेदन करता है, तो उसे महज एक घंटे के भीतर तैयार करके उपलब्ध करा दिया जाता है। निरीक्षण दल ने विश्वविद्यालय के हॉस्टल की सुविधाओं, विभिन्न कोर्सों और आंतरिक शिकायत निवारण समिति की कार्यप्रणाली का भी बारीकी से जायजा लिया।

​संवाद और समग्र मूल्यांकन

​प्रोफेसर कन्हैया त्रिपाठी ने किसी एक पक्ष तक सीमित न रहकर विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों और सीधे विद्यार्थियों से अलग-अलग मुलाकात की। इस खुली चर्चा के जरिए टीम ने विश्वविद्यालय के समग्र शैक्षणिक वातावरण और प्रशासनिक दक्षता का सटीक आकलन किया। अंत में, टीम ने छात्रों के अधिकारों की रक्षा और सुविधाओं को और अधिक सुलभ बनाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को कई जरूरी और उपयोगी सलाह दीं।