देहरादून. पंजाब से बड़ी संख्या में श्री हेमकुंड साहिब कूच को पहुंचे निहंग वापस लौटने के लिए तैयार हो गए हैं. पुलिस और प्रशासन के साथ निहंगों की देर रात तक बातचीत हुई. आखिर में निहंग वापस लौटे के लिए मान गए. बताया जा रहा है कि पुलिस और प्रशासन के साथ हो रही निहंगों की बातचीत के बीच कुछ निहंग पांवटा साहिब में बैरिकेड हटाकर देहरादून में दाखिल हो गए थे. हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें वापस भेज दिया.
जानकारी के मुताबिक गुरुवार रात को देहरादून पुलिस ने पांवटा साहिब में नाकेबंदी कर दी थी. इधर पहले से निर्धारित कार्यक्रम के तहत निहंग जत्थों ने गुरुवार को पंजाब से श्री हेमकुंड साहिब के लिए कूच किया. बैरिकेडिंग पर पुलिस और प्रशासन ने निहंगों को काफी समझाया, लेकिन निहंगों ने कृपाण दिखाकर बैरिकेट्स हटा दिए और देहरादून की तरफ भाग गए थे. इन सबकी वजह से माहौल तनावपूर्ण हो गया था. हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई.
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दरअसल, नगरासू स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब में निहंग सिखों द्वारा किए गए हंगामे और कब्जे के कारण यह विवाद चर्चा में था. निहंग सिखों का आरोप है कि स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन ने कर्णप्रयाग में हुई एक घटना में उनका पक्ष नहीं लिया था. बीते 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग (हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग) में निहंग श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यापारियों और युवकों के बीच किसी बात को लेकर हिंसक झड़प हुई थी. इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए निहंगों को गिरफ्तार किया था.
इस घटना से नाराज पंजाब से आए निहंगों ने नगरासू गुरुद्वारा प्रबंधन से सहयोग की अपील की थी. गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से अपेक्षित सहयोग न मिलने पर, निहंगों ने गुरुद्वारे के सेवादार के साथ मारपीट की और गुरुद्वारे के मुख्य भाग पर कब्जा कर लिया था. निहंगों द्वारा कुछ लोगों को बंधक बनाने की बात भी सामने आई थी. हालांकि बाद में उन लोगों को छोड़ दिया गया था. लेकिन सेवादार को अपने कब्जे में रखा. वे हथियार लहराते हुए गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए थे.

