राष्ट्रीय राजधानी में चलती बस में नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। घटना 4 अगस्त की बताई जा रही है। ग्रेटर नोएडा से कश्मीरी गेट के बीच चलने वाली एक स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ चालक और कंडक्टर पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप है। मामले की सूचना मिलने के बाद कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल बस को भी जब्त कर लिया है। पुलिस के अनुसार, घटना ग्रेटर नोएडा से कश्मीरी गेट के बीच चल रही स्लीपर बस में हुई। पीड़िता नाबालिग छात्रा है। मामले की जांच के तहत पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। चलती बस में नाबालिग के साथ हुई इस वारदात ने दिल्ली में करीब 14 साल पहले हुए निर्भया कांड की यादें ताजा कर दी हैं।

मां की डांट से नाराज होकर घर से निकली थी छात्रा

पुलिस के अनुसार, 16 वर्षीय पीड़िता अपने परिवार के साथ मैनपुरी जिले के एक गांव में रहती है और स्थानीय सरकारी इंटर कॉलेज में कक्षा 11वीं की छात्रा है। पुलिस को दिए बयान में छात्रा ने बताया कि 3 अगस्त को उसकी मां ने पढ़ाई को लेकर उसे डांटा था। इससे नाराज होकर वह अगले दिन यानी 4 अगस्त को बिना बताए घर से निकल गई। छात्रा नोएडा के सेक्टर-63 में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जाने के लिए बस में सवार हुई थी। पुलिस के मुताबिक, नोएडा में उस समय भारी बारिश और अंधेरा होने के कारण छात्रा गलती से परी चौक पर उतर गई।

खाली बस में वारदात का आरोप

पीड़िता के अनुसार, इसी दौरान उसे एक दूसरी बस आती दिखाई दी। उसने बस रुकवाकर चालक दल से नोएडा सेक्टर-63 जाने के बारे में पूछा। कंडक्टर द्वारा उसी दिशा में जाने की बात कहने के बाद वह बस में सवार हो गई। छात्रा ने पुलिस को बताया कि बस में उस समय कोई अन्य यात्री मौजूद नहीं था। कुछ देर बाद कंडक्टर ने उसके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि बाद में चालक और कंडक्टर ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। पुलिस के मुताबिक, बस देर रात दिल्ली पहुंची। आरोप है कि चालक और कंडक्टर छात्रा को कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर उतारकर वहां से फरार हो गए।

पुलिस फुटेज के आधार पर आरोपियों तक पहुंची

बस से उतारे जाने के बाद पीड़िता कश्मीरी गेट थाना पहुंची और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। पुलिस ने पीड़िता की चिकित्सकीय जांच कराने के बाद उसका बयान दर्ज किया। बयान के आधार पर पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण और मारपीट समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। कोतवाली ACP शंकर बनर्जी की निगरानी में पुलिस टीम ने मामले की जांच शुरू की। घटनास्थल और बस के संभावित मार्ग पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज के आधार पर पुलिस ने चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप की पहचान की। दोनों को तिमारपुर स्थित पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल बस को भी जब्त कर लिया है।

पर्दे लगी स्लीपर बस में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

चलती स्लीपर बस में नाबालिग छात्रा के साथ हुई वारदात ने सार्वजनिक परिवहन में महिला और नाबालिग यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2012 के निर्भया कांड (Nirbhaya incident) के बाद यात्री बसों में सुरक्षा को लेकर कई मानक और व्यवस्थाएं तय की गई थीं। इसके बावजूद इस मामले ने उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस के अनुसार, जिस स्लीपर बस में घटना हुई, वह करीब 47 किलोमीटर तक चली। बस की खिड़कियों पर पर्दे लगे होने की बात भी सामने आई है। अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इतने लंबे सफर के दौरान बस की निगरानी और सुरक्षा जांच की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।

वर्कशॉप से लौट रही थी बस, छात्रा को देखकर वारदात का आरोप

सूत्रों के अनुसार, घटना में इस्तेमाल स्लीपर बस में तकनीकी खराबी आ गई थी। इसे ठीक कराने के लिए चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप बस को ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित एक वर्कशॉप ले गए थे। मरम्मत के बाद दोनों खाली बस लेकर उत्तरी दिल्ली स्थित तिमारपुर पार्किंग लौट रहे थे। इसी दौरान परी चौक के पास छात्रा ने बस को रुकने का इशारा किया। पुलिस जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, दोनों ने उसे नोएडा सेक्टर-63 जाने की बात कहकर बस में बैठाया। इसके बाद छात्रा के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया। आरोप है कि घटना के बाद दोनों छात्रा को कश्मीरी गेट के पास छोड़कर तिमारपुर पार्किंग पहुंचे। पुलिस ने CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को वहीं से गिरफ्तार किया।

47 किलोमीटर के सफर में सुरक्षा जांच पर सवाल

परी चौक से कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर के सफर के दौरान बस की खिड़कियों पर पर्दे लगे होने की बात सामने आई है। ऐसे में बस के भीतर की गतिविधियां बाहर से आसानी से दिखाई नहीं दे सकती थीं। इस पूरे घटनाक्रम ने रात में चलने वाली स्लीपर और यात्री बसों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि बस जिस मार्ग से गुजरी, वहां उसकी निगरानी और जांच की व्यवस्था कैसी थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मार्ग मुख्य रूप से एक्सप्रेसवे और रिंग रोड से होकर गुजरता है। इन रास्तों पर नियमित बैरिकेडिंग करने से यातायात प्रभावित होने और जाम की स्थिति पैदा होने की आशंका रहती है। हालांकि, इस मामले ने नोएडा-दिल्ली सीमा और प्रमुख मार्गों पर रात के समय चलने वाले वाहनों की प्रभावी निगरानी को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं।

जांच तेज, फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने देर रात पीड़िता के परिजनों को दिल्ली बुलाया। महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में पीड़िता की काउंसलिंग कराई गई और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों की चिकित्सकीय जांच भी कराई है। वहीं, फोरेंसिक टीम ने बस की जांच कर कई साक्ष्य जुटाए हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक, बरामद जैविक नमूनों और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों को पीड़िता के नमूनों से मिलान के लिए भेजा जाएगा। DNA जांच की रिपोर्ट मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण हो सकती है।

GPS और पैनिक बटन की व्यवस्था पर भी सवाल

घटना के बाद कमर्शियल यात्री वाहनों में सुरक्षा के लिए लगाए गए GPS आधारित लाइव व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTD) और पैनिक बटन की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमों के तहत ऐसे सुरक्षा उपकरणों को संबंधित कंट्रोल रूम से जोड़े जाने की व्यवस्था है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत सूचना मिल सके। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि घटना के समय बस में उपलब्ध सुरक्षा और ट्रैकिंग प्रणालियां सक्रिय थीं या नहीं। यदि बस में पैनिक बटन और ट्रैकिंग सिस्टम लगा था, तो उसके जरिए कोई अलर्ट क्यों नहीं मिला, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। लंबी दूरी की यात्री और स्लीपर बसों में सुरक्षा निगरानी के लिए CCTV कैमरों की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया गया है। इस मामले में बस के अंदर की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से बाहरी मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी पड़ी।

क्या था दिल्ली का निर्भया कांड?

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के वसंत विहार इलाके में चलती बस में 23 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। घटना के दौरान उसका एक पुरुष मित्र भी बस में मौजूद था। वारदात के बाद दोनों को सड़क पर छोड़ दिया गया था। गंभीर रूप से घायल युवती की बाद में इलाज के दौरान 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर में मौत हो गई थी। इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। मामले में कुल छह आरोपी थे। इनमें राम सिंह की जेल में मौत हो गई थी, जबकि एक नाबालिग आरोपी को कानून के तहत सुधार गृह भेजा गया और बाद में रिहा कर दिया गया।वयस्क आरोपियों अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को दोषी ठहराया गया। करीब सात साल से अधिक समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद चारों दोषियों को 20 मार्च 2020 की सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी गई।

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